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ICC की BCCI को दो टूक, विश्व कप में धोनी नहीं पहन पाएंगे बलिदान बैज वाले ग्लव्स

Sat, 08 Jun 2019 10:26 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्टस डेस्क, अमर उजाला
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एमएस धोनी बलिदान बैज - फोटो : सोशल मीडिया
महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स पर बलिदान बैज विवाद में एक नया मोड़ आ चुका है। क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ICC ने अपना फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि माही ने नियमों को तोड़ा है। मतलब साफ है कि अब पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज विकेटकीपर धोनी विश्व कप में बलिदान बैज पहनकर नहीं खेल पाएंगे।

ICC ने अपना अधिकारिक बयान जारी करते हुए बीसीसीआई से कहा कि धोनी ने नियमों का उल्लंघन किया है। वह ग्लव्स पर कोई निजी मैसेज नहीं लिख सकते हैं। शुक्रवार सुबह विवाद बढ़ता देख BCCI ने ICC से मांग की थी कि धोनी को बलिदान बैज वाले ग्लव्स पहनकर खेलने की इजाजत दी जाए। इसी मांग पर ICC ने यह जवाब दिया है।
 
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क्या है पूरा मामला?

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MS Dhoni - फोटो : social Media
विश्व कप के अपने पहले मैच में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को मात दी। धोनी उस मैच में ऐसे दस्ताने पहनकर उतरे जिसपर भारतीय सेना के प्रतीक चिन्हों में से एक 'बलिदान बैज' नजर आ रहा था। इसी चिन्ह पर आईसीसी ने आपत्ति जताई थी। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के लोगो और ड्रेस कोड के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी तय ड्रेस या किट से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। यहां तक कि उस पर किसी प्रकार का दूसरा रंग भी नहीं इस्तेमाल किया जा सकता। ड्रेस पूरी तरह से साफ होनी चाहिए और उसके रंग में भी कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
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धोनी ने क्यों पहना बैज?

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ms dhoni army
महेंद्र सिंह धोनी को 2011 में टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि से नवाजा गया था। उसके बाद साल 2015 में धोनी ने पैरा फोर्सेज के साथ बुनियादी ट्रेनिंग और फिर पैराशूट से कूदने की स्पेशल ट्रेनिंग भी पूरी की जिसके बाद धोनी को पैरा रेजिमेंट में शामिल किया गया और उन्हें ये बैज लगाने की अनुमति दी गई। यह पहली बार नहीं है जब धोनी ने पैरा फोर्सेज से जुड़ी निशानी को पहना हो, इससे पहले वो IPL के दौरान बलिदान बैज वाले टोपी और फोन के कवर पर इस निशानी को लगाए देखे जा चुके हैं। धोनी अक्सर सेना की टोपी या सेना सी जुड़ी निशानियों को अपने कपड़ों या बैग पर लगाए दिख जाते हैं। वे पहले ही अपने इरादे बताते हुए कह चुके हैं कि क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वो सेना में जाकर देश सेवा करना चाहते हैं।
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