भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आज भारत के सबसे सफल और वर्ल्ड कप के दूसरे सबसे सफल कप्तान बन गए हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि उलकी इस अपार सफलता के पीछे एक अनोखा मूलमंत्र काम कर रहा है।
'कैप्टन कूल' धोनी की पुरानी थ्योरी कम से कम अभ्यास ज्यादा से ज्यादा लाभ की रही है। आप विश्वास करें या न करें लेकिन पिछले 3 सालों से अभ्यास सत्र के दौरान वो विकेटकीपिंग का जरूरी अभ्यास नहीं करते फिर भी मैच के दौरान बतौर विकेटकीपर उनका प्रदर्शन उच्च स्तरीय रहता है।
अलबत्ता मैच के दिन दस कैच पकड़ने का जरूरी अभ्यास अवश्य कर लेते हैं। इसे माही का अनूठा तरीका कह सकते हैं। अभ्यास के दिन कभी-कभार उन्हें विकेटकीपिंग के ग्लव्स पहने देखा भी गया हो लेकिन विकेटकीपिंग पैड पहने शायद ही देखा गया होगा।
प्रैक्टिस में वो कैच का अभ्यास, नेट पर बल्लेबाजी या गेंदबाजी भी करते हैं, लेकिन विकेटकीपिंग को लेकर ड्रिल नहीं करते, जैसा सैयद किरमानी, किरण मोरे, नयन मोंगिया और यहां तक कि ऋदिमान साहा करते रहे हैं।
सपोर्ट स्टाफ के एक सदस्य ने कहा कि उनकी विकेटकीपिंग ड्रिल बस इतनी रहती है कि मैच के दिन 10 कैच पकड़ लेते हैं ताकि ग्लव्स पर गेंद के लगने का अहसास भर हो जाए।