जसप्रीत बुमराह की पत्नी संजना गणेशन के साथ आईसीसी के एक कार्यक्रम के दौरान बातचीत में धोनी ने वर्ल्ड कप जीतने वाले दिन की कुछ अनसुनी कहानियां भी सुनाईं। इस दौरान वहां ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर माइक हसी भी मौजूद थे। धोनी ने बताया कि वह आमतौर पर भावुक नहीं होते हैं, लेकिन जीत की खुशी ने उन्हें उस दिन भावुक कर दिया था। अपने सबसे खास पल के बारे में बताते हुए धोनी ने कहा- सबसे अच्छा अहसास जीत से पहले 15-20 मिनट था।
धोनी ने कहा- हमें बहुत ज्यादा रनों की जरूरत नहीं थी। हमारे बल्लेबाजों ने अच्छी और मजबूत साझेदारियां की थी। इसके बाद स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने वंदे मातरम गाना शुरू कर दिया। मुझे लगता है कि उस माहौल को फिर से बनाना बहुत मुश्किल है - शायद इस साल भारत में होने वाले विश्व कप में भी ऐसा ही नजारा हो। आप जानते हैं, उस माहौल को दोहराना बहुत कठिन है, लेकिन इसे केवल तभी दोहराया जा सकता है जब वैसा ही अवसर हो जैसा 2011 में था। तब जब 40, 50 या 60 हजार लोग साथ गा रहे हों।
धोनी ने कहा- मेरे लिए जीत का क्षण सबसे खास नहीं था, मेरे लिए खास पल मैच खत्म होने से 15-20 मिनट पहले शुरू हो चुका था, जब मैं पूरी तरह भावुक हो गया था। मैं उस मैच को खत्म करना चाहता था। हम जानते थे कि हम उस मैच को उस क्षण से जीत ही लेंगे और हमारे लिए हारना तब बहुत मुश्किल था। यह एक संतुष्ट करने वाला अहसास था कि काम हो गया। अब आगे का रास्ता देखते हैं।
2011 में दो अप्रैल का दिन भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के लिए भी खास था। तेंदुलकर ने दो दशक लंबे करियर में आखिरकार एक आईसीसी ट्रॉफी जीती थी। धोनी ने खुलासा किया कि कई बार वह सोचते थे कि क्या सचिन विश्व कप ट्रॉफी अपने हाथ में लेने में कामयाब हो पाएंगे? धोनी ने कहा- हम सभी जानते थे कि यह पाजी (तेंदुलकर) का आखिरी विश्व कप था और पूरे टूर्नामेंट के दौरान हमें लग रहा था कि हम उनके लिए यह करना चाहते हैं। साथ ही आपके दिमाग में यह भी चल रहा होता है भगवान ने उन्हें (सचिन) सब कुछ दिया है और वह हर किसी से एक चीज दूर रखते हैं। क्या यह 50 ओवर का विश्व कप है जो भगवान ने तय किया है कि वह सचिन से दूर रखेंगे?
धोनी ने कहा- हमने सोच रखा था कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम अपना 100 प्रतिशत मैदान पर दें और अंत में परिणामों को स्वीकार करें। अंत में मैच जीतकर हम बहुत खुश हैं। भारत ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए फाइनल में श्रीलंका को छह विकेट से हरा दिया था। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 274/6 का स्कोर खड़ा किया। महेला जयवर्धने (103 *) के नाबाद शतक, कप्तान कुमार संगकारा (48), नुवान कुलसेखरा (32) और थिसारा परेरा (22 *) की शानदाक पारियों ने श्रीलंका को अच्छे स्कोर तक पहुंचाया। युवराज सिंह और जहीर खान ने दो-दो और हरभजन सिंह ने एक विकेट लिया।
275 रनों का पीछा करते हुए भारत ने सहवाग (0) और तेंदुलकर (18) का विकेट जल्दी खो दिया था। इसके बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली (35) के बीच 83 रनों की साझेदारी ने भारत की संभावनाओं को जीवित कर दिया था। गंभीर ने 122 गेंदों में 97 रन बनाए और कप्तान एमएस धोनी के साथ चौथे विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी की। धोनी और युवराज (21 *) ने पांचवें विकेट के लिए नाबाद 54 रनों की साझेदारी की, जिसने टीम इंडिया को 28 वर्षों में अपना पहला विश्व कप खिताब दिलाया। धोनी 79 गेंदों में 91 रन बनाकर नाबाद रहे।