कप्तान विराट कोहली ने टीम इंडिया में फिटनेस का स्तर बहुत ऊंचा किया है और धोनी इस मामले में कहीं पीछे नहीं हैं। हालांकि, धोनी के बल्ले की चमक काफी समय से फीकी नजर आ रही है।
इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके प्रदर्शन में लगातार गिरावट देखने को मिली। मगर बात अगर टी-20 इंटरनेशनल के प्रदर्शन पर की करें तो पाएंगे की धोनी का प्रदर्शन खराब नहीं रहा। दाएं हाथ के बल्लेबाज ने पिछले 7 टी20 मैचों में 150 से अधिक की स्ट्राइक रेट के साथ 123 रन बनाए।
चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान ने आईपीएल के 11वें सीजन में अपनी चमक बिखेरी और 16 मैचों में 455 रन बनाकर टीम को चैंपियन बनाया। अब गौर करने वाली बात है कि आंकड़ों के लिहाज से धोनी का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन उन्हें टीम से बाहर करने का ठोस कारण क्या रहा। इसके जवाब की खोज में हर कोई होगा। क्या वन-डे के मौजूदा फॉर्म को देखते हुए धोनी को बाहर किया गया?
एमएस धोनी और विराट कोहली
बीसीसीआई ने शुक्रवार को चार टीमों की घोषणाओं से पहले लंबी बैठक की। इसमें निश्चित ही कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री भी शामिल हुए होंगे। टीम चयन के समय 93 टी20 इंटरनेशनल मैच के अनुभवी धोनी के नाम पर क्या विचार किया गया, इसका खुलासा होना बाकी है।
क्या वाकई धोनी में अब कप्तान और कोच को भी वो दम नजर नहीं आता? क्या अब इन दोनों ने भी मान लिया है कि भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने की जरूरत है और ऐसे में टीम इंडिया को धोनी को बाहर करने का बड़ा फैसला लेना होगा। इसका जवाब क्रिकेट फैंस को कब तक मिलेगा यह देखने वाली बात रहेगी। यह भी पता करना होगा कि क्या धोनी को बाहर करने से पहले चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने उनसे बातचीत की होगी?
भारतीय क्रिकेट में हमेशा से देखा गया है कि महान खिलाड़ियों को ड्रॉप करने का जोखिम कोई उठाना पसंद नहीं करता है। धोनी को अच्छे से पता है कि चयनकर्ताओं के लिए भारत के दिग्गज खिलाड़ियों को ड्रॉप करना तो नामुमकिन सा है।
चयनकर्ता तो ऐसी परिस्थिति में खिलाड़ियों के संन्यास लेने का इंतजार करती है। हालांकि, समय बहुत ज्यादा हो चला है। धोनी ने दिखाया कि वह भी इंसान हैं और खेल से संन्यास का बड़ा फैसला लेना आसान नहीं। इसलिए चयनकर्ताओं को इतना बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। धोनी का 2019 विश्व कप में खेलना लगभग तय है, लेकिन 2020 में होने वाले वर्ल्ड टी20 में नया विकेटकीपर खेलते दिख सकता है।
यह भी देखने वाली बात रहेगी कि धोनी इंटरनेशनल क्रिकेट के कितने मैच विदेशी पिच पर खेलेंगे क्योंकि वह अच्छे फॉर्म में नहीं हैं और फॉर्म में लौटने के लिए ज्यादा गेंदों का सामना भी नहीं किया है।
एमएस धोनी सीमित ओवर क्रिकेट में सक्रिय हैं। इसके चलते उनके पास काफी समय बचा। माही ने इसका फायदा नहीं उठाया और घरेलू क्रिकेट से दूरी बनाना ठीक समझा। कई क्रिकेट पंडित भी धोनी को घरेलू क्रिकेट खेलने की सलाह दे चुके हैं, लेकिन पूर्व कप्तान ने किसी की नहीं सुनी।
धोनी ने विजय हजारे ट्रॉफी में नहीं खेलने का फैसला किया। इसका असर भी उनके प्रदर्शन पर स्पष्ट दिखा। वह गेंद पर टाइमिंग करने के लिए संघर्ष करते दिखे। धोनी ने कई मौकों पर बेहद धीमी बल्लेबाजी की और आलोचकों को आमंत्रित किया।
अब यह देखना होगा कि आगामी रणजी ट्रॉफी में धोनी खेलने का मन बनाते हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि धोनी फिट हैं, लेकिन उनका अच्छी लय में आना जरूरी है, जिसके लिए उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलते रहना चाहिए। क्या चयनकर्ताओं ने इस पर भी ध्यान दिया और खराब फॉर्म को आधार बनाते हुए धोनी की टीम से छुट्टी कर दी।
धोनी को टीम से बाहर किए जाने के पीछे की वजह ऋषभ पंत के मौजूदा फॉर्म को भी माना जा सकता है। पंत को धोनी का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। पंत ने अपनी उपयोगिता भी दर्शाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं व टीम प्रबंधन को प्रभावित किया।
पंत को अब टीम इंडिया ने तीनों फॉर्मेट में आजमाया है। इसे देखते हुए लगता है कि भारतीय क्रिकेट अब भविष्य की तैयारियों में जुट गया है। धोनी की भूमिका पर किसी को शक नहीं है। वह टीम इंडिया में अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे हैं।
धोनी एक बेहतरीन विकेटकीपर होने के साथ-साथ टीम मेंटर भी हैं। हालांकि, टी20 गेम पूरी तरह बदल गया है और इसे देखते हुए धोनी को बाहर करने का फैसला कितना सही है, यह तो वक्त ही बताएगा।