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MS Dhoni Birthday: मैदान पर कप्तान धोनी के पांच बड़े फैसले, जिसने बदला भारतीय क्रिकेट का इतिहास

Tue, 07 Jul 2020 12:46 AM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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एमएस धोनी - फोटो : सोशल मीडिया
दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में शुमार टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आज अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। हालांकि लंबे वक्त से चर्चा चल रही है कि धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बना लिया है। आईपीएल के टलने से पहले धोनी इसकी तैयारियों में जुटे थे। माना जा रहा था कि यह लीग धोनी के लिए एक बार फिर से भारतीय टीम का दरवाजा खोलेगी। धोनी कब-क्या फैसला लेंगे ये शायद उनके अलावा कोई और नहीं जानता, जैसे वो मैदान में भी अपने फैसलों से सभी को चौंका देते थे। 

आईसीसी के सभी टूर्नामेंट जीतने वाले एमएस दुनिया के इकलौते कप्तान हैं। टी-20 विश्व कप, वन-डे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी के खिताब उनकी झोली में शामिल हैं। एक नजर मैदान पर लिए गए उनके कुछ फैसलों पर डालते हैं, जिसने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर को ही बदल कर रख दिया।
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2011 विश्व कप - फोटो : सोशल मीडिया
2011 के वर्ल्ड कप के दौरान धोनी लय में नहीं थे, लेकिन फाइनल मुकाबले में वो युवराज सिंह से पहले नंबर पांच पर बल्लेबाजी करने उतरे। जबकि युवराज ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन खेल दिखाया था। धोनी का यह फैसला सही साबित हुआ। भारतीय कप्तान ने 79 गेंदों पर नाबाद 91 रन बनाए जिसमें आठ चौके और दो छक्के शामिल थे। धोनी ने दबाव में बेहतरीन पारी खेली और भारतीय टीम को 275 रन के लक्ष्य तक पहुंचाकर विश्व चैंपियन बनाया।
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टी-20 विश्व कप 2007 - फोटो : social Media
भारत ने 2007 विश्व टी-20 के फाइनल में पाकिस्तान को 158 रन का लक्ष्य दिया था। पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन की दकरकार थी और धोनी ने जोगिंदर शर्मा के हाथों में गेंद सौंप दी। जोगिंदर शर्मा ने कमाल दिखाते हुए मिस्बाह-उल-हक का विकेट चटकाकर लक्ष्य का बचाव किया। भारत पांच रन से फाइनल जीत टी-20 का पहला विश्व चैंपियन बना था। अनुभवहीन शर्मा पर भरोसा करने का धोनी का निर्णय एक मास्टरस्ट्रोक था।

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रोहित शर्मा और एमएस धोनी - फोटो : फाइल फोटो
रोहित शर्मा एकदिवसीय में मध्यक्रम में खेलते हुए लगातार असफल हो रहे थे। धोनी ने उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में उतारा और उसके बाद तो रोहित ने बतौर ओपनर तूफान ही मचा दिया। रोहित ने अपने एकदिवसीय करियर में तीन दोहरे शतक लगाए हैं और यह उपलब्धि हासिल करने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं। रोहित ने इंग्लैंड में खेले गए 2013 के चैंपिंयस ट्रॉफी से ओपनिंग की कमान संभाली और तब से अपने बल्ले से धूम मचा रहे हैं।

रोहित शर्मा और शिखर धवन के नाम 16 शतकीय साझेदारी है और वे इस सूची में एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हेडन के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली है जिनके नाम 21 शतकीय साझेदारी है।
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रवींद्र जडेजा - फोटो : सोशल मीडिया
मुरली विजय, रवींद्र जडेजा और सुरेश रैना के शुरुआती दिनों में खराब प्रदर्शन के बावजूद भी धोनी ने इन खिलाड़ियों को बैक किया और भरोसा जताया। तीनों ही खिलाड़ियों ने धोनी की उम्मीद पर पानी नहीं फेरा। विजय ने टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज के रूप में खुद को साबित किया और रैना काफी समय तक भारतीय मध्यक्रम का अहम हिस्सा रहे। जडेजा अब तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम का एक अहम हिस्सा हैं। 
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सचिन और सहवाग - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2012 में धोनी ने ऑस्ट्रेलिया में सीबी त्रिकोणीय श्रृंखला के दौरान सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर की तिकड़ी को रोटेट करने का फैसला किया। फील्डिंग भी एक बड़ी वजह थी, लेकिन गंभीर ने संन्यास के बाद इस फैसले पर कहा था कि 'ट्राई सीरीज में वो हम तीनों (सचिन, सहवाग, गंभीर) को एक साथ नहीं खिला सकते क्योंकि उन्हें 2015 वनडे विश्व कप के लिए टीम तैयार करनी है। हालांकि उस सीरीज भारतीय टीम सफल नहीं हो पाई थी, लेकिन धोनी के फील्डिंग को लेकर तब का सख्त रवैया आज की नई और युवा टीम साफ दिखता है। उन्होंने फील्डिंग में चुस्ती के लिए अहम और कड़े फैसले लिए।
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