इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने इंग्लिश क्रिकेट में बड़े बदलाव की वकालत करते हुए रवि शास्त्री को ब्रेंडन मैकुलम का संभावित उत्तराधिकारी बताया है। ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज में इंग्लैंड की करारी हार के बाद मैकुलम और उनकी 'बैजबॉल' रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने महज 11 दिनों के भीतर सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है। तेज और उछालभरी पिचों पर इंग्लैंड का आक्रामक खेल पूरी तरह नाकाम रहा। न बल्लेबाजी में निरंतरता दिखी और न ही गेंदबाजी में दम, जिससे विदेशी धरती पर इंग्लैंड की कमजोरी एक बार फिर उजागर हो गई।
शास्त्री के रिकॉर्ड से प्रभावित पनेसर
पत्रकार रवीश बिष्ट से बातचीत में पनेसर ने कहा कि इंग्लैंड को ऐसे कोच की जरूरत है, जिसे ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में हराने का अनुभव हो। उन्होंने कहा, 'आपको यह सोचना होगा कि ऑस्ट्रेलिया को हराने का तरीका कौन जानता है? मानसिक, शारीरिक और रणनीतिक रूप से उनकी कमजोरी का फायदा कैसे उठाया जाए। मेरे हिसाब से रवि शास्त्री को इंग्लैंड का अगला हेड कोच बनना चाहिए।' पनेसर की यह राय रवि शास्त्री के ऑस्ट्रेलिया में शानदार रिकॉर्ड पर आधारित है। शास्त्री के कोच रहते भारत ने 2018-19 और 2020-21 में लगातार दो टेस्ट सीरीज ऑस्ट्रेलिया में जीती थीं। इन ऐतिहासिक जीतों ने विदेशी दौरों पर भारतीय टीम की सोच और आत्मविश्वास दोनों को नई दिशा दी।
चौथे टेस्ट से पहले इंग्लैंड की टीम में बदलाव
इसके उलट इंग्लैंड की टीम पर्थ, ब्रिसबेन और एडिलेड में खेले गए तीनों टेस्ट में बेबस नजर आई। बल्लेबाज दबाव में जल्दी ढहते रहे, जबकि गेंदबाज लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह पाए, जिसका ऑस्ट्रेलिया ने पूरा फायदा उठाया। इसके बीच इंग्लैंड ने चौथे टेस्ट से पहले टीम में बदलाव किए हैं। जोफ्रा आर्चर पूरी सीरीज से बाहर हो चुके हैं और उनकी जगह गस एटकिंसन को शामिल किया गया है। वहीं, ऑलराउंडर जैकब बैथल को ओली पोप की जगह अंतिम एकादश में मौका दिया गया है। हालांकि, इंग्लैंड की विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में पहुंचने की उम्मीदें पहले ही खत्म हो चुकी हैं।
शास्त्री का बतौर कोच रिकॉर्ड शानदार
रवि शास्त्री का कोचिंग रिकॉर्ड पनेसर की बात को और मजबूती देता है। 2017 से 2021 तक भारत के कोच रहते हुए शास्त्री ने 43 टेस्ट में 25 जीत दर्ज कीं। इसके अलावा भारत ने उनके कार्यकाल में 76 वनडे में 51 और 65 टी20 मैचों में 42 जीत हासिल कीं। भले ही आईसीसी ट्रॉफी नहीं मिल पाई, लेकिन शास्त्री को भारत को विदेशी परिस्थितियों में एक मजबूत टीम बनाने का श्रेय जरूर दिया जाता है।