सार
मोहम्मद शमी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उनके बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी ने खुलासा किया कि न्यूजीलैंड सीरीज में मौका नहीं मिलने के बाद तेज गेंदबाज ने टेस्ट टीम में वापसी की उम्मीद छोड़ दी थी। कोच के मुताबिक, शमी अभी दो साल और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। वहीं, पूर्व भारतीय खिलाड़ी लक्ष्मी रतन शुक्ला ने शमी के टेस्ट करियर के अंत के लिए मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की आलोचना की।
भारतीय टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले के बाद उनके बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि शमी पिछले काफी समय से टेस्ट टीम में वापसी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने और शमी के परिवार ने कई बार उन्हें संन्यास का फैसला टालने और थोड़ा इंतजार करने की सलाह दी थी, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए चयन नहीं होने के बाद उन्हें वापसी की उम्मीद लगभग खत्म लगने लगी थी। शमी ने शुक्रवार रात टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपने टेस्ट डेब्यू के ठीक 13 साल बाद यह फैसला लिया। उन्होंने 6 नवंबर 2013 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था।
न्यूजीलैंड सीरीज में चयन नहीं होने से निराश हुए शमी
- मोहम्मद शमी के संन्यास पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए उनके बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि वह पिछले एक साल से काफी परेशान थे। टीम में मौका नहीं मिलने के कारण उनकी निराशा लगातार बढ़ रही थी।
- सिद्दीकी ने कहा, 'यह फैसला काफी समय से उनके मन में चल रहा था। मैंने पहले उन्हें ऐसा करने से रोका था और कुछ समय इंतजार करने को कहा था। उनके बड़े भाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उन्हें जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी थी। लेकिन जब उन्हें लगा कि न्यूजीलैंड सीरीज के बाद टेस्ट टीम में वापसी की कोई उम्मीद नहीं बची है, तो उन्होंने संन्यास का एलान कर दिया।'
- उन्होंने बताया कि भुवनेश्वर कुमार की टी20 टीम में वापसी के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि शायद शमी को भी न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे या टेस्ट सीरीज में मौका मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
शमी अपनी परेशानी किसी के सामने जाहिर नहीं करते थे
बदरुद्दीन सिद्दीकी के मुताबिक, शमी पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान थे, लेकिन वह अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर नहीं करते थे। वह सामान्य व्यवहार करते थे और अपनी फिटनेस व अभ्यास पर ध्यान देते रहते थे। कोच ने बताया, 'मैं हमेशा उनसे कहता था कि मेहनत करना हमारा काम है। बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ दो और फिट रहो, क्योंकि खेलने का मौका कभी भी मिल सकता है। वह मेरी बात मानते थे। जब भी मेरे पास आते थे, बच्चों के साथ अभ्यास करते थे। बल्लेबाज हों या गेंदबाज, सभी उनके साथ सुबह से शाम तक अभ्यास करते थे।'
मोहम्मद शमी
- फोटो : ANI/ICC
रणजी ट्रॉफी में प्रदर्शन के बावजूद फिटनेस पर सवाल उठने से हैरान थे कोच
- शमी की फिटनेस को लेकर उठे सवालों पर भी उनके कोच ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि जब शमी घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे और विकेट लेकर अपनी टीम को जीत दिला रहे थे, तो उन्हें टेस्ट क्रिकेट के लिए अनफिट कैसे माना जा सकता है?
- सिद्दीकी ने कहा कि शमी ने रणजी ट्रॉफी में 20 ओवर तक गेंदबाजी की और लगातार चार-पांच विकेट लेकर बंगाल को जीत दिलाई। उनके मुताबिक, शमी के साथ खेलने वाले युवा गेंदबाजों के प्रदर्शन में भी सुधार आया है।
- उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में प्रतिभाशाली गेंदबाजों की कमी नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव की भी उतनी ही जरूरत होती है। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी गेंदबाजों के साथ खेलने से युवा खिलाड़ियों को काफी कुछ सीखने को मिलता है।
कोच का दावा- दो साल और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे शमी
बदरुद्दीन सिद्दीकी का मानना है कि मोहम्मद शमी में अभी कम से कम दो साल और टेस्ट क्रिकेट खेलने की क्षमता थी। उन्होंने इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे चुनौतीपूर्ण विदेशी दौरों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मौकों पर शमी और बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाजों की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा, 'मेरे हिसाब से शमी अभी दो साल और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। अगर उन्हें मौका मिलता तो वह युवा गेंदबाजों को काफी कुछ सिखा सकते थे। इससे अगले दो साल में भारतीय टीम के पास तेज गेंदबाजों का एक मजबूत पूल तैयार हो सकता था।'
लक्ष्मी रतन शुक्ला ने चयनकर्ता अजीत अगरकर पर साधा निशाना
शमी के टेस्ट करियर के अंत को लेकर बंगाल के मुख्य कोच और पूर्व भारतीय ऑलराउंडर लक्ष्मी रतन शुक्ला ने भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इस स्थिति के लिए मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर को जिम्मेदार ठहराया। शुक्ला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि शमी ने भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए कभी किसी विवाद को जन्म नहीं दिया और न ही किसी के खिलाफ गलत टिप्पणी की। सभी चाहते थे कि वह टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले मैदान पर शानदार विदाई हासिल करें। उन्होंने अगरकर की कार्यशैली की आलोचना करते हुए उन पर कई कड़े आरोप लगाए। हालांकि, ये शुक्ला के व्यक्तिगत विचार हैं।
मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया
- फोटो : x @MdShami11
ऐसा रहा मोहम्मद शमी का शानदार टेस्ट करियर
मोहम्मद शमी ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता में धमाकेदार अंदाज में की थी। डेब्यू मुकाबले में उन्होंने कुल 9 विकेट (9/118) हासिल किए थे, जो टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ मैच प्रदर्शन भी है। शमी ने भारत के लिए 64 टेस्ट मैच खेले और 27.71 की औसत से कुल 229 विकेट हासिल किए। उनके नाम छह बार एक पारी में पांच विकेट लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह टेस्ट क्रिकेट में भारत के 12वें सबसे सफल गेंदबाज और तेज गेंदबाजों की सूची में छठे स्थान पर हैं। शमी ने अपना आखिरी टेस्ट मैच जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में खेला था। यह मुकाबला लंदन के द ओवल मैदान पर हुआ था, जिसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा था।
अब सफेद गेंद के क्रिकेट पर रहेगा शमी का फोकस
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद मोहम्मद शमी का पूरा ध्यान अब सीमित ओवरों के क्रिकेट पर रहेगा। वह 14 नवंबर से बंगाल की ओर से सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेलते नजर आएंगे। बंगाल का पहला मुकाबला मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में कर्नाटक के खिलाफ होगा। इसके बाद वह विजय हजारे ट्रॉफी में भी हिस्सा लेंगे। बदरुद्दीन सिद्दीकी को भरोसा है कि शमी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि जिस लय और फिटनेस के साथ शमी इस समय गेंदबाजी कर रहे हैं, उसे देखकर उनकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल है। वह आज भी 26 से 30 साल के गेंदबाज जैसी तेजी और धार के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने के बावजूद शमी के प्रशंसकों को अब भी उनसे वनडे और टी20 क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।