मिताली राज के लिए 2017 महिला वर्ल्ड कप अब तक काफी अच्छा रहा है। उन्होंने लीग मैचों में अपनी बल्लेबाजी के कई रिकॉर्ड बनाए और फिर भारतीय टीम के फाइनल में पहुंचते ही उन्होंने एक खास रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया। भारतीय वन-डे क्रिकेट इतिहास में मिताली पहली कप्तान बन गई हैं, जिनके नेतृत्व में टीम इंडिया दूसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची हो।
इससे पहले भारतीय टीम साल 2005 में वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची थी, जहां उसे ऑस्ट्रेलिया से शिकस्त झेलना पड़ी थी। मिताली ने यह उपलब्धि हासिल करते हुए कई भारतीय पुरुष टीमों के कप्तानों को पीछे छोड़ दिया। पुरुष कप्तानों की बात करें तो कपिल देव, सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने एक-एक बार फाइनल में जगह बनाई। मगर इनमें से कोई कप्तान दूसरी बार टीम को 50 ओवर प्रारूप वाले वर्ल्ड कप के फाइनल में नहीं पहुंचा पाया।
कपिल देव की कप्तानी में भारत ने 1983 का खिताब जीता , सौरव गांगुली के नेतृत्व में 2003 में भारत फाइनल में पहुंचा। 'कैप्टन कूल' की कप्तानी में भारत 2011 का चैंपियन बना। मिताली राज की टीम 2005 में विश्व चैंपियन बनने से चूकी जबकि इस साल वो इंग्लैंड को हराकर विश्व चैंपियन बनने की कोशिश करेगी।
मिताली मौजूदा वर्ल्ड कप में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं। वहीं, टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की टॉप 10 प्लेयर्स की लिस्ट में वो पांचवें नंबर पर मौजूद हैं। मौजूदा वर्ल्ड कप में मिताली ने 392 रन बनाए हैं।