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ऋषभ पंत के शानदार प्रदर्शन के पीछे इस शख्स का बड़ा हाथ, कभी खुद बल्ला पकड़ना सिखाया

Sat, 05 Jan 2019 07:07 AM IST
अंशुल तलमले सत्येन्द्र पाल सिंह
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21 बरस के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपने लिए सिडनी टेस्ट यादगार बना दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस चौथे और आखिरी टेस्ट के दूसरे दिन पहली पारी में पंत ने शतक जड़ा। दिल्ली से रणजी खेलने वाले रुड़की के वाशिंदे ऋषभ पंत ऑस्ट्रेलिया में सेंचुरी ठोकने वाले एशिया के पहले विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए।
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साथ ही ऋषभ (नॉटआउट 159) ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसकी धरती पर टेस्ट मैच में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए। महज नौ टेस्ट के यंग क्रिकेट करियर में पंत का यह दूसरा शतक है। 
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इसके पहले ऋषभ पंत ने बेहद मुश्किल हालातों में इंग्लैंड के खिलाफ उसी के घर में अपना पहला शतक मारा था। ऋषभ की यह पारी दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स (169) के बाद किसी भी मेहमान टीम के विकेटकीपर द्वारा टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया में खेली दूसरी सबसे बड़ी पारी है। वह साथ ही टेस्ट मैचों में दो हाफ सेंचुरी भी जड़ चुके हैं।

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इस बेहतरीन सेंचुरी पर उनके उस्ताद तारक सिन्हा से अमर उजाला से खास बातचीत की। तारक सिन्हा ने कहा, 'ऋषभ पंत को यह साबित करना था कि वह टेस्ट क्रिकेट के भी अच्छे बल्लेबाज हैं। ऋषभ को टीम इंडिया की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी करने की थी और वह इसमें कामयाब रहे। उन्होंने पारी के शुरू में खुद पर संयम रखा। वह दरअसल अभी बहुत नौजवान हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने लिए आगे बहुत कामयाबियां हासिल करनी है।'
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तारक सिन्हा बताते हैं, 'मेरी ऋषभ से 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन बात हुई थी। मैंने तब उन्हें चेताया था कि टीम इंडिया की टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए खुद पर कुछ अंकुश रख उसकी जरूरत के मुताबिक खेलना सीखना होगा। मैंने उनसे यही कहा था कि महज 30-40 रन की पारी खेलोगे तो टीम इंडिया में जगह गंवाने का खतरा है। मेरी सलाह पर ऋषभ ने गौर किया और नतीजा उनकी सिडनी टेस्ट में मैच की नजाकत के मुताबिक बेहतरीन नॉटआउट सेंचुरी के रूप में सभी के सामने है।’
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तारक कहते हैं, 'ऋषभ ने मुझे बताया कि उन्हें चयनकर्ताओं ने साफ किया है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वन-डे सीरीज के लिए टीम इंडिया से बाहर नहीं किया गया बल्कि आराम दिया गया है। ऋषभ की सबसे अच्छी बात यह है कि वह बहुत जल्दी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मिजाज और उसकी जरूरत को समझ रहे हैं। वह जितना ज्यादा टेस्ट, वन-डे और टी-20 भारतीय टीम के लिए खेलेंगे उतना और परिपक्व होंगे। ऋषभ की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उन्हें अब क्रिकेट के हर फॉर्मेट के मुताबिक खुद को ढाल कर गियर बदल कर खेलना खूब जानते हैं। मुझे अपने शागिर्द ऋषभ की क्षमता पर पूरा भरोसा है। वह इसी तरह मेहनत करना जारी रखेंगे और क्रिकेट में नई बुलंदियां चूमेंगे।’
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