चौथे और अंतिम टेस्ट में भारतीय टीम के खेल को देखने के बाद एक बात तो तय हो गई कि यह मैच टीम इंडिया की पहुंच से बहुत दूर हो गया है। धोनी ने बहादुरी दिखाते हुए 4 रन से पिछड़ने के बावजूद पारी घोषित कर दी। अगर धोनी यह हिम्मत कल के स्कोर पर दिखाते तो शायद इस मैच की तस्वीर कुछ और होती। चौथे दिन का खेल खत्म होने के बाद तो इस मैच के ड्रॉ होने की संभावना बढ़ गई।
भारतीय टीम ने चौथे दिन के शुरुआती एक घंटे में बल्लेबाजी कर केवल 29 रन बनाकर पारी घोषित कर दिया। धोनी से पिच से गेंदबाजों को मिलने वाला फायदा इंग्लैंड के बल्लेबाजों को दे दिया। इंग्लैंड ने चौथे दिन बल्लेबाजी करते हुए दूसरी पारी में 3 विकेट के नुकसान पर 161 रन बनाकर इस पिच पर रन बनने का मिथक तोड़ दिया। इंग्लैंड के पास चौथे दिन का खेल खत्म होने तक 165 रनों की बढ़त हो चुकी है।
अब भारतीय टीम जब पांचवें दिन खेलने उतरेगी तो उसकी पहली समस्या इंग्लैंड के बल्लेबाजों को आलआउट करना है। इंग्लैंड के अभी 7 विकेट शेष है जबकि इस टेस्ट में एक दिन में औसत 5 विकेट ही गिरे है। ऐसे में क्या पांचवें दिन टीम इंडिया इंग्लैंड को कम से कम दो सत्र में आलआउट कर सकती है? इस बात की संभावना कम दिखती है। तो क्या यह मान लिया जाए कि टीम इंडिया इस मैच में अपनी हार बचा लेगी क्योंकि जीत तो उसकी दिख नहीं रही है।