जब गेंदबाज गेंद फेंकने से पहले नॉन स्ट्राइक पर खड़े बल्लेबाज को आउट करता है, उसे मांकडिंग रनआउट कहते हैं। दरअसल, गेंदबाज को जब लगता है कि नॉन स्ट्राइकर बल्लेबाज उसके गेंद फेंकने से पहले ही क्रीज से बाहर निकल गया है, तो वह नॉन-स्ट्राइकर छोर की बेल्स गिराकर बल्लेबाज को आउट कर सकता है। चूंकि गेंद फेंकी नहीं गई होती है, इसलिए वह रिकॉर्ड तो नहीं होती, लेकिन बल्लेबाज जरूर आउट हो जाता है।
दूसरी पारी का 13वां ओवर चल रहा था। अश्विन गेंदबाजी कर रहे थे, जबकि नॉन स्ट्राइक पर जोस बटलर खड़े थे। वह 43 गेंदों पर 69 रन बनाकर खेल रहे थे। अश्विन अपने ओवर की पांच गेंद फेंक चुके थे।
आखिरी गेंद फेंकने के लिए वो जैसे ही क्रीज पर आए, उन्होंने देखा कि बटलर क्रीज से बाहर निकल गए हैं। अश्विन ने मौके का फायदा उठाते हुए नॉन-स्ट्राइकर छोर की गिल्लियां गिरा दीं। इस तरह बटलर को मांकडिंग रनआउट करार दिया गया।
क्रिकेट इतिहास में 13 दिसंबर, 1947 को मांकडिंग की पहली घटना हुई थी। भारतीय खिलाड़ी वीनू मांकड ने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज बिल ब्राउन को इसी तरीके से रनआउट किया था। उस समय भी वीनू मांकड की खूब आलोचना हुई थी, लेकिन तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान डॉन ब्रैडमैन ने माकंड के रनआउट का समर्थन किया था। इस घटना के बाद से ही बल्लेबाजों को इस तरह आउट होने की घटना को अनौपचारिक तौर पर माकंडिंग कहा जाता है।
मांकडिंग रन आउट को लेकर साल 2017 में एक नियम आया था कि गेंदबाज को नॉन स्ट्राइकर छोर पर खड़े बल्लेबाज को रन आउट करने की अनुमति मिलेगी, लेकिन तब जब वह गेंद फेंकने का पूरी तरह अनुमान लगा चुका हो। अगर गेंदबाज उस समय रन आउट करने में असफल रहता है तो अंपायर उस गेंद को डेड बॉल घोषित कर देगा।