2017 में चमकी किस्मत
साल 2017 तक उमरान मलिक मोहल्ला क्रिकेट के स्टार हुआ करते थे। उन्होंने कभी लेदर गेंद से गेंदबाजी नहीं की थी। हर मैच में वो 500 से तीन हजार रुपये तक कमा लेते थे। 2017 की ठंडियों में उमरान मौलाना आजाद स्टेडियम में पहुंचे और कोच रणधीर सिंह से कहा "सर क्या आप मुझे बॉल डालने देंगे?... क्या नाम है तुम्हारा?...उमरान मलिक।"
इस समय मलिक ने गेंदबाजी करने के लिए स्पाइक वाले जूते तक नहीं पहने थे, लेकिन रणधीर सिंह को लगा कि उन्हें गेंदबाजी का मौका देना चाहिए और यहीं से उमरान की किस्मत बदल गई। राज्य की सीनियर टीम के बल्लेबाज जतिन वाधवान इस समय स्ट्राइक ले रहे थे। उमरान की गति से जतिन भी परेशान हुए। कश्मीर की सीनियर टीम के तेज गेंदबाज राम दयाल ने भी ने भी कहा कि इस लड़के का भविष्य शानदार है। इसके बाद रणधीर सिंह ने मलिक को आगे मौका देने का फैसला किया।
फल की दुकान लगाते हैं पिता
उमरान के पिता फल की दुकान लगाते हैं। वो चाहते थे कि बेटा पढ़ लिखकर परिवार का नाम करे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर उन्हें पेशेवर क्रिकेटर बनने के लिए प्रेरित किया। 2017-18 में उमरान ने एकेडमी में दाखिला तो लिया, लेकिन वो लगातार प्रैक्टिस के लिए नहीं आते थे। कोच रणधीर ने कहा "वह एक दिन आता था और बाकी के चार-पांच दिन गायब रहता था। हम उसे समझाते थे कि मौके को ऐसे नहीं जाने दिया जा सकता, उसे लगातार अभ्यास के लिए आना होगा।"
अंडर-19 क्रिकेट के ट्रायल में उमरान ने अपने साथी गेंदबाज से जूते मांगकर गेंदबाजी की थी। कुच बिहार ट्रॉफी के लिए उनका चयन भी हुआ, लेकिन सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला। इस मैच में भी बारिश बाधा बनी। हालांकि, इस मैच में भी उमरान ने अपनी छाप छोड़ी। विकेटकीपर स्टंप से 35 यार्ड की दूरी पर खड़ा था। अंडर-19 क्रिकेट में ऐसे नजारे कम ही देखने को मिलते हैं।
असम के कोच ने गेंदबाजी से रोका
असम की टीम एक मैच के लिए कश्मीर आई थी और टीम के कोच अजय रात्रा ने उमरान से कहा कि क्या वो उनके बल्लेबाजों के लिए नेट्स में गेंदबाजी करेंगे। उमरान तुरंत मान गए, लेकिन 15 मिटन बाद रात्रा ने उन्हें गेंदबाजी करने से रोक दिया। उनकी टीम को मैच खेलना था और वो नहीं चाहते थे कि उनके बल्लेबाज चोटिल हो जाएं। रात्रा इस बात से हैरान थे कि उमरान रणजी क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं।
तावी नदी के किनारे घर होने से मिला फायदा
एक तेज गेंदबाज के लिए शरीर के ऊपरी हिस्से के मजबूत होने से ज्यादा जरूरी होता है शरीर के निचले हिस्से का मजबूत होना। मजबूत पैरों के बदौलत ही गेंदबाज अच्छी लय के दौड़ते हैं और तेजी के साथ गेंद फेंकते हैं। उमरान का घर तावी नदी के किनारे है और उनके घर के पास की जमीन रेतीली है। वो रेत से भरी जमीन पर ही खेलते हुए बड़े हुए और यहीं क्रिकेट खेला। इसी वजह से उनके पैर बेहद मजबूत हैं।
सनराइजर्स हैदराबाद का हिस्सा बनने से पहले मलिक कभी भी नियमित तौर पर जिम नहीं गए थे, लेकिन उनका शरीर एक तेज गेंदबाज के लिहास शानदार है। टेनिस बॉल क्रिकेट में यॉर्कर की अहमियत बहुत ज्यादा होती है। जसप्रीत बुमराह ने भी टेनिस गेंद से ही यॉर्कर गेंद सीखी थी और उमरान मलिक के साथ भी ऐसा ही है।
अब्दुल समद ने की मदद
जून 2020 में पहले लॉकडाउन के बाद अब्दुल समद उमरान मलिक की गेंदबाजी के वीडियो रिकॉर्ड करते थे और उन्हें वीवीएस लक्ष्मण और टॉम मूडी को भेजते थे। सनराइजर्स को उमरान की गेंदबाजी पसंद आई और इसके बाद जो हुआ वह इतिहास बन गया। साल 2020 में उमरान नेट गेंदबाज के रूप में यूएई गए और 2021 में भी उनका यही हाल था। टी नटराजन के चोटिल होने के बाद उन्हें खेलने का मौका मिला और लगातार 150 की गति से गेंदबाजी करने वाले उमरान को 2021 टी20 विश्व कप में नेट गेंदबाज के रूप में ले जाया गया। अब उमरान के लिए चीजें तेजी से बदल रही हैं, लेकिन कोच रणधीर सिंह को विश्वास है कि वो इन चीजों को संभालकर स्टेन जैसे खिलाड़ियों से सीखेंगे और आगे बढ़ेंगे।