भारतीय क्रिकेट पर छाए काले बादल दिन ब दिन गहरे होते चले जा रहे हैं। अब टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की प्रतिबद्धता ही शक के घेरे में आ गई है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्पोर्ट्स मार्केटिंग फर्म रीति स्पोर्ट्स में धोनी की 15 फीसदी हिस्सेदारी है। इस कंपनी ने धोनी के अलावा सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा, प्रज्ञान ओझा और आरपी सिंह से अनुबंध किया हुआ है।
ऐसे में साफ तौर पर हितों के टकराव की स्थिति बनती दिख रही है क्योंकि बिजनेस पार्टनर होने के अलावा वह टीम इंडिया के कप्तान भी हैं और खिलाड़ियों के चयन में उनका सीधे तौर पर दखल है।
हालांकि रीति स्पोर्ट्स ने साफ किया है कि धोनी सिर्फ थोड़े समय के लिए ही कंपनी में शेयरहोल्डर थे और वर्तमान में वह हिस्सेदार नहीं है।
वहीं बीसीसीआई का कार्यभार संभाल रहे जगमोहन डालमिया ने भी धोनी का बचाव करते हुए कहा कि इस मामले पर कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी।
इस बीच क्रिकेटर आरपी सिंह ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि उनका रीति स्पोर्ट्स से कोई अनुबंध नहीं है।
वर्ष 2010 में रीति स्पोर्ट्स ने धोनी के साथ 210 करोड़ रुपये की डील की थी, जिसमें धोनी को हर साल 70 करोड़ रुपये मिलने थे।
रोचक बात यह है कि यह कंपनी धोनी के पुराने दोस्त अरुण पांडे की है। इस कंपनी से जुड़े दो खिलाड़ी न सिर्फ भारतीय टीम बल्कि चेन्नई सुपर किंग्स में भी शामिल हैं।
रीति स्पोर्ट्स चेन्नई सुपर किंग्स को भी मैनेज करती है। 15 फीसदी हिस्सेदारी का सीधा मतलब यह हुआ कि कंपनी को इन खिलाड़ियों के प्रमोशन से होने वाले फायदे का 15 फीसदी हिस्सा सीधे धोनी को मिलेगा।
ऐसे में सवाल उठते हैं कि क्या इन खिलाड़ियों के टीम में चयन के मौके पर धोनी तटस्थ फैसला ले पाते हैं।
‘कंपनी पर धोनी की कुछ राशि बकाया थी, इसलिए 22.04.13 को उन्हें हिस्सेदार बनाया गया। मगर 26.04.13 को यह राशि चुका दी गई और उसके बाद यह हिस्सेदारी वापस कंपनी को ट्रांसफर कर दी गई।’ -अरुण पांडे, चेयरमैन रीति स्पोर्ट्स
‘मैं नहीं जानता कि खबरों में क्या चल रहा है, लेकिन मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि मैं रीति स्पोर्ट्स के साथ नहीं हूं।’--आर पी सिंह, भारतीय क्रिकेटर