पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज मदन लाल ने रवि शास्त्री का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड को हितों के टकराव का नियम कचरे के डिब्बे में फेंक देना चाहिए। इस नियम के अनुसार कोई भी खिलाड़ी एक साथ संस्था के दो पदों पर नहीं रह सकता है। मदनलाल ने कहा कि शास्त्री ने जो भी कहा है वो उसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं। लोढ़ा कमेटी ने दो नियम बनाए थे। इनमें से हितों के टकराव वाला नियम कचरे के डिब्बे में फेंक दिया जाना चाहिए। इससे क्रिकेट का हित होगा और वही लोग ऑफिस में होंगे जो आसानी से काम कर सकते हैं। पूर्व खिलाड़ियों को ही ऑफिस में पद मिलना चाहिए, क्योंकि वो खेल और बोर्ड की गरिमा बनाए रख सकते हैं।
वहीं मदनलाल ने आगे कहा कि उम्र की जो अधिकतम सीमा 60 से 65 की गई है, उसे 70 से ज्यादा किया जाना चाहिए। क्रिकेटर्स फिट हैं और सभी काम कर सकते हैं। हमें बोर्ड के लिए अच्छे लोगों की जरूरत है, जो न सिर्फ खेल अच्छा करें बल्कि, बीसीसीआई को करोड़ों-अरबों की इंडस्ट्री बनाएं।
क्या बोले थे शास्त्री
रवि शास्त्री ने हितों के टकराव के नियम को खराब बताते हुए कहा था कि इसकी वजह से क्रिकेट जगत की हस्तियों पर गलत प्रभाव पड़ा है। इसी वजह से वो आईपीएल में कमेंट्री नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने रिकी पॉन्टिंग का उदाहरण दिया जो कमेंट्री करते हैं और दिल्ली के मुख्य कोच भी हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के साथ काम करने वाला आईपीएल टीम के साथ काम नहीं कर सकता। हितों का टकराव बिल्कुल बकवास है। अगर मैं कोच हूं तो मुझे कमेंट्री करने की अनुमति नहीं मिल सकती, यह कैसा हितों का टकराव है।
अभी कोच नहीं बनेंगे शास्त्री
शास्त्री ने एक निजी वेबसाइट से बातचीत में बताया था कि कोरोना प्रोटोकाल के सख्त नियमों के कारण वो कोच का पद भी छोड़ना चाहते थे। आईपीएल टीम के कोच बनने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैं अभी एक बायो-बबल से बाहर आया हूं। मुझे अब ताजी हवा चाहिए। मेरी किसी से बात नहीं हो रही है। मैंने इस विषय (कोच बनने) पर किसी से चर्चा नहीं की है। मेरी किसी टीम से बात नहीं हो रही है। मैं बस आभी आराम करना चाहता हूं। निश्चित रूप से टेलीविजन और मीडिया में वापस जाऊंगा। वह चीज मुझे सबसे ज्यादा पसंद है।”