कभी अपनी मुस्कान से प्रशंसकों के प्रिय बने और टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज रहे लक्ष्मीपति बालाजी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है।
बालाजी पहली बार 18 नवंबर 2002 में वनडे मैच के जरिए वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया से जुड़े थे। हालांकि उनका क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर चोट के कारण काफी प्रभावित रहा जिस कारण वह लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल पाए।
वह टीम इंडिया के लिए सिर्फ 8 टेस्ट मैच ही खेल सके। इसके अलावा उन्होंने 30 वनडे और 5 टी-20 मैच भी खेले हैं।
उनके छोटे से करियर का सबसे नायाब समय वह था जब बालाजी 2004 में टीम इंडिया के साथ पाकिस्तान के दौरे पर गए जहां वह अपनी शानदार गेंदबाजी और मुस्कान के कारण काफी लोकप्रिय हो गए थे। इसके अगले साल 2005 में पाकिस्तान के ही खिलाफ खेला गया टेस्ट मैच उनके करियर का अंतिम टेस्ट मैच बना।
बालाजी के दम पर टीम इंडिया ने पाक में जीती थी पहली टेस्ट सीरीज
Lakshmipathy Balaji
- फोटो : Getty
2004 में भारत का यह पाक दौरा बालाजी के लिए बेहद यादगार रहा। इस दौरे का तीसरा और निर्णायक टेस्ट मैच रावलपिंडी में खेला गया जिसमें बालाजी ने पाकिस्तान के कप्तान इंजमाम-उल-हक समेत कुल 7 विकेट झटके थे। बालाजी ने उस दौरे को अपने लिए बेहद यादगार बताया।
वह कभी भी इस दौरे को नहीं भुल सकते क्योंकि उन्हीं की वजह से भारत ने तीसरे टेस्ट में जीत हासिल करते हुए पाकिस्तान में पहली बार कोई टेस्ट सीरीज जीती थी।
चोट से परेशान रहने के बाद अगले साल वापसी करते हुए बालाजी ने एक बार फिर पाकिस्तान की टीम के खिलाफ जोरदार गेंदबाजी की। इस सीरीज का पहला टेस्ट मैच मोहाली में खेला गया जिसमें उन्होंने 9 विकेट झटके। उन्होंने अपने 8 टेस्ट में 6 मैच पाक के खिलाफ खेले।
2012 में महज 21 दिन में ही निपट गया बालाजी का टी-20 करियर
- फोटो : Getty
हालांकि बालाजी का वनडे करियर थोड़ा लंबा चला। 2002 से 2009 तक के अपने करियर में उन्होंने 30 वनडे खेले और 34 विकेट झटके। दूसरी ओर आईपीएल में लगातार कामयाबी के बाद वह टी-20 से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटे। 2009 में अंतिम वनडे खेलने के बाद 11 सितंबर 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला टी-20 मैच खेला। लेकिन महज 21 दिन ही उनका यह करियर भी खत्म हो गया। 2 अक्टूबर को बालाजी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। 5 टी-20 मैच में उन्होंने 10 विकेट झटके थे।
चेन्नई का यह तेज गेंदबाज अनिल कुंबले को जहां अपना क्रिकेट ऑइकन मानता है, तो तेज गेंदबाज जहीर खान ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने उनके करियर को संवारा। उन्होंने कहा, "जहीर लगातार मुझसे अपनी बातें साझा करते थे और मुझे प्रोत्साहित भी किया करते थे। वह बेहद शानदार इंसान हैं।" उन्होंने अपने समय में टीम इंडिया के कोच रहे जॉन राइट की भी खूब तारीफ की। उनके अनुसार उन्होंने उन पर विश्वास किया और आगे बढ़ने का मौका दिया।
बालाजी ने क्रिकेट के लंबे प्रारूप से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए कहा, "मेरे लिए अब आगे बढ़ने का समय आ गया है, मेरे पास अब एक परिवार है। मैंने 16 साल प्रथम श्रेणी क्रिकेट को दिए हैं।" उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 106 मैच खेले जिसमें 330 विकेट झटके हैं।
जहां तक अंतरराष्ट्रीय करियर का सवाल है तो उन्होंने 8 टेस्ट मैचों में 27 विकेट झटके थे। बालाजी 2011-12 तक रणजी ट्रॉफी में तमिलनाडु के कप्तान भी रहे। उनकी अगुवाई में तमिलनाडु की टीम इसी साल रणजी में उपविजेता रही। वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो एक समय में एक साथ बतौर खिलाड़ी और कोच के रूप में काम करते रहे। अब संन्यास लेने के बाद वह क्या करेंगे इसका खुलासा तो नहीं किया, लेकिन माना जा रहा है कि तमिलनाडु टीम के गेंदबाजी कोच बने रहेंगे।