शुक्रवार की शाम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर टीम इंडिया के कोच के लिए आवेदन की तारीख को बढ़ाकर 9 जुलाई तक कर दिया। बीसीसीआई और सीएसी को अनिल कुंबले के विकल्प की तलाश करनी है। पूर्व दिग्गज लेग स्पिनर का टीम इंडिया के साथ एक साल काफी सफल रहा और टीम ने नए कीर्तिमान रचे।
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बोर्ड ने अपनी रीलीज में कहा कि उसे नहीं लगता कि कुंबले को सीधे प्रवेश मिलने के कारण बहुते से लोगों ने आवेदन किया हो। उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें सीधे एंट्र दी गई थी। अब वो इस दौड़ का हिस्सा नहीं हैं, तो कई इच्छुक लोगों को अपने रिज्यूम भेजने का मौका मिलेगा। 25 तारीख को बोर्ड ने नए एप्लिकेशन मांगे थे। बोर्ड के अनुसार ऐसा करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार जरूरी थी।
हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुलासा किया कि 21 मई को आईपीएल-10 के फाइनल के दिन अनिल कुंबले के मुलाकात सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासन समिति के अधिकारियों से हुई थी, जहां उन्होंने खिलाड़ियों और कोच की सैलरी के बारे में बात की थी। वो इस पूरी प्रणाली को दुरुस्त कराना चाहते थे।
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अभिमानी लग रहे थे कुंबले
विराट कोहली, अनिल कुंबलें और कुलदीप यादव
- फोटो : IBTimes
अगर दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कुंबले के रेपोटेशन उनके खिलाफ गया। प्रशासन समिति वो काफी दबाव बनाने वाले और अभिमानी लग रहे थे। सीओए ने अपने परेशानी खत्म करने कके लिए सीएसी के यह जिम्मा सौप दिया। इसके बाद कहा गया कि सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण इस मामले में कोहली और कुंबले से बात कर फैसला लेंगे।
बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "यह काफी दुखद है कि टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और साथी खिलाड़ियों को अनुशासनहीन अवारा लड़कों की तरह पेश किया जा रहा है। ऐसा लगा रहा कि टीम को कोच की जरूरत ही नहीं। यह गलत धारणा बन रही है। इससे ऐसा भी प्रतीत हो रहा है कि बीसीसीआई इस मामले को सही तरीके से नहीं संभाल पा रहा है और बोर्ड की छवि धूमिल हो रही है।"
करीब एक दशक पहले तेंदुलकर और गांगुली भी ग्रेग चैपल को कोच के रूप में नहीं चाहते थे। टीम इंडिया के करीबी सूत्र के अनुसार विराट और टीम के अन्य सदस्यों से सीएसी से कहा, "अनिल कुंबले खुद 'अल्फा मेल' बनाना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि अंतिम एकादश भी वही चुनें। वो खुद को चयनकर्ता भी बनाना चाहते हैं। ऐसा नहीं चलता, टीम हमेशा कप्तान की होती है और फैसला लेने का अधिकार उसी के पास है। पहले अजहर थे, फिर सौरव, राहुल के बाद धोनी आए और अब कोहली का बारी है।"
चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के दौरान कोहली ने सीएसी के सदस्यों के साथ 4 घंटे तक बैठक की। यह उस वक्त हुआ, जब उन्हें ध्यान टूर्नामेंट पर देना चाहिए था। उन चार घंटों में कोहली ने साफ किया को वो टीम को कुंबले क्यों नहीं चाहिए। उनका रवैया अड़ियल है। वो बर्दाश्त के बाहर हैं और वो खिलाड़ियों के साथ ठीक व्यवहार नहीं करते।
कुंबले पर आरोप है कि वो अंतिम 11 खिलाड़ियों के चयन में भी दखल देना चाहते हैं। उनका रवैया काफी जिद्दी किस्म का है। आईपीएल में उनके साथ खेल चुके 2 सीनियर खिलाड़ी भी ऐसा ही मानते हैं। वो अपनी गलती कभी नहीं मानते। वो यह मान ही नहीं सकते की टीम कोहली की है, वो टीम पर अपना अधिकार चाहते थे।