केशव महाराज की कहानी
- फोटो : Keshav Maharaj Instagram
केशव अक्सर चर्चा में रहते हैं और 'जय श्रीराम' और 'जय बजरंग बली' के नारे लगाकर वह सुर्खियों में आए। हालांकि, क्या आपको पता है कि उनका उत्तर प्रदेश से खास कनेक्शन है। उनके पूर्वज यूपी के सुल्तानपुर जिले में रहते थे। हालांकि, काफी साल पहले काम की तलाश में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे और फिर वहीं बस गए। इसलिए केशव जब भी भारत आते हैं तो यहां मंदिरों में दर्शन करने के लिए जरूर जाते हैं। 2023 वनडे विश्व कप के दौरान केशव ने अयोध्या में राम मंदिर में रामलला के दर्शन भी किए थे। आइए उनकी कहानी जानते हैं...
केशव महाराज की कहानी
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केशव ने परिवार के साथ साझा की तस्वीर
केशव दक्षिण अफ्रीका के डब्ल्यूटीसी खिताब जीतने के बाद ग्रीम स्मिथ से बात करते हुए रो पड़े थे। उन्होंने इसे देश और देश के क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि बताया था। साथ ही यह भी कहा था कि यह खिताब देश को एकजुट करने में मदद करेगा। केशव के पूर्वज उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले हैं। उनके परिवार में उनके और उनकी पत्नी लेरिशा मुनसामी के अलावा उनके माता-पिता और उनकी एक बहन है, जिसकी शादी श्रीलंका में हुई है। केशव ने डब्ल्यूटीसी जीतने के बाद टीम और परिवार के साथ तस्वीर भी साझा की। इसमें एक तस्वीर में वह, पत्नी लेरिशा मुनासामी, बेटी मिलन और पिता आत्मानंद महाराज और मां कंचन माला के साथ नजर आए। इस दौरान उनके हाथ में टेस्ट का गदा भी दिखा।
केशव, उनकी मां कंचन और पिता आत्मानंद
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सुल्तानपुर से डरबन गए थे केशव के पूर्वज
भारत में लगभग डेढ़ सौ साल पहले जब अंग्रेजों का शासन था तब उनके पूर्वज कृषि कार्य करने के लिए सुल्तानपुर से दक्षिण अफ्रीका चले गए थे। बाद में वहीं बस गए और वहां की नागरिकता भी ले ली। केशव महाराज भी तब से वहीं रह रहे हैं। केशव के पिता आत्मानंद महाराज ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था, 'उनके पूर्वज सन 1874 में डरबन आ गए थे। उस दौरान लोग अच्छा जीवन जीने और काम की तलाश में दक्षिण अफ्रीका का रुख कर रहे थे। कृषि क्षेत्र के अनुभव और अन्य काम में भारतीयों को महारत थी। अंग्रेज शासित अन्य देशों में इनको बेहतर काम मिल जाया करता था।' आत्मानंद के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका में अच्छी स्किल रखने वाले मजदूरों की जरूरत थी। भारतीयों के पास कृषि का काफी अनुभव था। वे अन्य कामों में भी निपुण थे और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता थी।'
आत्मानंद और कंचन
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क्यों कहा जाता था गिरमिटिया मजदूर?
आत्मानंद के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका में उन्हें 'गिरमिटिया मजदूर' कहा जाता था। गिरमिटिया शब्द 'गिरमिट' शब्द से निकला है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों को अंग्रेजी शासन काल में एक एग्रीमेंट के आधार पर भारत से दूसरे देशों में ले जाया जाता था। भोजपुरी में एग्रीमेंट शब्द को न बोल पाने की वजह से 'गिरमिट' कहा जाता था। इसलिए इस एग्रीमेंट के तहत भारत से जाने वाले मजदूरों को गिरिमिटिया कहा जाने लगा।
केशव अपनी मां और पिता के साथ
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कैसे पड़ा महाराज उपनाम?
आत्मानंद का कहना है कि वह अपने परिवार की पांचवीं या छठी पीढ़ी हैं। उन्होंने बताया, 'हम पांचवीं या छठी पीढ़ी के भारतीय हैं और मेरी एक संपत्ति मूल प्रमाण पत्र है। जब मैं अध्ययन करने के लिए भारत गया, तो मुझे इस प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। इस तरह मैं अपने मूल और पारिवारिक इतिहास का पता लगा सकता था। भारत (मैसूर) में रहना बहुत सुखद नहीं था, इसलिए मैं वापस आ गया। मैंने फिजिकल एजुकेशन में पढ़ाई पूरी की और इसे स्कूलों में पढ़ाया।' आत्मानंद के मुताबिक, उन्होंने अपने पूर्वजों से 'महाराज' उपनाम लिया है और यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे उन्होंने खुद चुना है। आत्मानंद ने बताया, 'महाराज उपनाम मेरे पूर्वजों से लिया गया है। यह उपाधि हमने नहीं चुनी है। यह पीढ़ियों से चली आ रही है। मैं भारत में इस नाम के महत्व को जानता हूं।'
केशव महाराज की कहानी
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लेरिशा से मुलाकात और फिर शादी, अनोखी प्रेम कहानी
पेशेवर कथक डांसर लेरिशा मुनसामी के साथ केशव की प्रेम कहानी भारतीय संस्कृति के साथ उनके घनिष्ठ संबंध को दर्शाती है। दोनों की मुलाकात आपसी दोस्तों के जरिए हुई और जल्दी ही दोनों के बीच प्यार बढ़ने लगा। कुछ वर्षों तक डेटिंग करने के बाद केशव ने 2019 में लेरिशा को प्रपोज किया। हालांकि, कोविड महामारी और परिवार के किसी सदस्य के निधन के कारण उनकी शादी स्थगित कर दी गई। आखिरकार उन्होंने 2022 में एक पारंपरिक भारतीय रीति रिवाजों के साथ शादी की, जो केशव की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
केशव महाराज की कहानी
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केशव और लेरिशा की प्रेम कहानी किसी भारतीय फिल्म की तरह है। केशव के साथ अपनी पहली डेट पर लेरिशा देर से पहुंची, लेकिन केशव के धैर्य और समझदारी ने उनका दिल जीत लिया। इतना ही नहीं केशव ने अपनी मां के 50वें जन्मदिन पर लेरिशा के साथ कथक नृत्य भी किया था। इससे उनकी मां बहुत प्रभावित हुईं और केशव और लेरिशा की शादी के लिए हामी भर दी।
केशव महाराज की कहानी
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लेरिशा के सोशल मीडिया पर बहुत सारे फैंस हैं। वह एक निपुण कथक डांसर हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर हजारों फॉलोअर्स हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और केशव के साथ अपने जीवन के पलों को शेयर करती हैं। उनके शानदार डांस वीडियो अक्सर लोगों को काफी पसंद आते हैं।
केशव महाराज की कहानी
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बजरंग बली के भक्त हैं केशव महाराज
केशव महाराज का भारतीय संस्कृति से जुड़ाव उनके वंश से कहीं आगे तक फैला हुआ है। वह हिंदू धर्म में सबसे पूजनीय देवताओं में से एक भगवान हनुमान के भक्त हैं। उनकी आध्यात्मिकता दुनिया के सामने तब स्पष्ट हुई जब फैंस ने अक्तूबर 2023 में नीदरलैंड के खिलाफ विश्व कप मैच के दौरान उनके क्रिकेट बैट पर (ॐ) लिखा देखा। केशव नियमित रूप से मंदिरों में जाते हैं और महत्वपूर्ण मैचों से पहले भगवान हनुमान से आशीर्वाद लेते हैं, जो उनकी गहरी आध्यात्मिक मान्यताओं को दर्शाता है।
केशव महाराज
- फोटो : Keshav Maharaj (instagram)
केशव की कुल संपत्ति और कमाई
2023 तक केशव महाराज की कुल संपत्ति लगभग पांच मिलियन यूएस डॉलर होने का अनुमान है, जो लगभग 41.6 करोड़ भारतीय रुपये है। उनकी संपत्ति मुख्य रूप से उनके क्रिकेट करियर से जुड़ी हुई है। इसमें दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड और विभिन्न घरेलू टीमों के साथ उनके अनुबंध शामिल हैं। केशव की कमाई खेल के अलग-अलग प्रारूप के आधार पर अलग-अलग है। अपनी राष्ट्रीय टीम के अलावा, केशव ने क्वाजुलु-नताल, डॉल्फिन, लंकाशायर, डरबन हीट, यॉर्कशायर और डरबन सुपर जाएंट्स सहित विभिन्न टीमों के लिए भी खेला है। 2023 में उन्होंने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में डरबन सुपर जाएंट्स के लिए खेलते हुए 1.2 करोड़ रुपये कमाए।
टेस्ट मैच: $281,250 (2.42 करोड़ रुपये)
वनडे मैच: $75,000 (64.53 लाख रुपये)
T20I मैच: $50,000 (43.02 लाख रुपये)
केशव, बेटी मिलन और पत्नी लेरिशा
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35 साल के केशव ने अब तक दक्षिण अफ्रीका के लिए 58 टेस्ट, 48 वनडे और 39 टी20 मैच खेले हैं। टेस्ट में उनके नाम 199 विकेट, वनडे में 58 विकेट और टी20 में 38 विकेट हैं। टेस्ट में उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 129 रन देकर नौ विकेट है, जबकि वनडे में 33 रन देकर चार विकेट है। टी20 में उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 27 रन देकर तीन विकेट है। केशव आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स से खेल चुके हैं। दो मैचों में उन्होंने दो विकेट लिए थे।