भारतीय टीम के अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर को आठ साल बाद भारतीय टीम में जगह मिली थी, लेकिन उनके लिए इंग्लैंड दौरा खट्टी-मिट्ठी यादों भरा रहा है। करुण को इस बात का अफसोस है कि वह इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। वह पहले चार मैचों में अपनी शानदार शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाए, लेकिन ओवल टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में 57 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेलकर प्रभाव छोड़ा।
करुण का मानना है कि भविष्य में रन बनाने के लिए जरूरी है कि वह इंग्लैंड दौरे की इन निराशाओं को पीछे छोड़ दें। करुण ने इंग्लैंड दौरे से पहले 2017 में आखिरी बार भारत के लिए टेस्ट मैच खेला था, लेकिन उन्हें घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन की मदद से भारतीय टीम में दोबारा शामिल होने का मौका मिला। करुण ने चार टेस्ट मैच में 25 की औसत से 205 रन बनाए जिसमें सिर्फ एक अर्धशतक शामिल है। भारत और इंग्लैंड के बीच यह सीरीज 2-2 से बराबर रही थी।
करुण ने कहा, मैं ओवल में मिली शुरुआत को शतक में नहीं बदल पाने से निराश था, लेकिन पहले दिन के खेल के दौरान टिके रहना महत्वपूर्ण था क्योंकि टीम मुश्किल स्थिति में थी। मैं थोड़ा घबराया हुआ था लेकिन अच्छा महसूस कर रहा था। मैं उम्मीद कर रहा था कि मैं इसे शतक में बदल पाऊंगा जो मैं नहीं कर सका। मैंने काफी सोचा लेकिन जो हो चुका है उसे भूलकर अगले कुछ महीनों में मुझे क्या करना है इस पर ध्यान देना जरूरी है। यह मेरा ध्यान बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि मैं आगे बढ़ूं और चाहे किसी भी स्तर पर खेलूं, वहां बड़े स्कोर बनाऊं।
गिल और गंभीर की सराहना की
करुण ने कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर की कड़ी टक्कर वाली पांच मैच की टेस्ट सीरीज में टीम को एकजुट रखने के लिए सराहना की। करुण ने कहा, शुभमन ने जिस तरह से सभी को एकजुट रखा और जो प्रोत्साहन दिया वह देखने लायक था। शुरुआत से ही उनका संवाद बिल्कुल स्पष्ट था। एक बल्लेबाज के तौर पर उन्होंने जो हासिल किया, उसे हासिल करने के साथ-साथ टीम का नेतृत्व भी किया। शुरुआत में ही गौती भाई (गंभीर) ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि हम इसे एक बदलाव के दौर से गुजर रही टीम के रूप में देखें। वह नहीं चाहते थे कि हम ऐसा महसूस करें। हमें जो पहला संदेश मिला वह था कि यह कोई युवा टीम नहीं है, यह एक बेहतरीन टीम है और सभी को इसे अपने अंदर से महसूस करना चाहिए।
मैनचेस्टर में पंत की बल्लेबाजी से प्रभावित थे करुण
करुण मैनचेस्टर में चौथे टेस्ट के दौरान चोटिल ऋषभ पंत की बल्लेबाजी से बहुत प्रभावित थे और उन्होंने कहा कि उनके रवैये ने पूरी टीम को परिभाषित किया। उन्होंने कहा, ऋषभ को पैर के टूटे अंगूठे के साथ बल्लेबाजी करते देखना यह सीरीज के सबसे यादगार पलों में से एक था। यह देखना सभी के लिए आश्चर्यजनक था। इससे पता चलता है कि वह कितने महान खिलाड़ी हैं और उससे भी महत्वपूर्ण बात है कि वह कैसे इंसान हैं।