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तब डर से थर्राते थे कपिल देव, दिलो-दिमाग में बस चुका था इस भारतीय कप्तान का खौफ

Thu, 16 Jul 2020 08:51 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वेंकटराघवन (बाएं) कपिल देव (दाएं) - फोटो : ट्विटर
वैसे तो कपिल देव की गिनती भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में होती है। भले ही उन्होंने अपने नेतृत्व में 1983 का विश्व कप दिलाकर देश में क्रिकेट की दिशा ही बदल दी। भारतीय क्रिकेट में नई ऊर्जा फूंकी, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कप्तानों के कप्तान कपिल देव भी अपने किसी कप्तान से बेहद घबराते थे।
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कपिल देव - फोटो : ट्विटर
'हरियाणा हरिकेन' के नाम से मशहूर कपिल ने बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में डेब्यू किया। 'लिटिल मास्टर' सुनील गावस्कर की टीम में खुद को निखारा लेकिन, एक और पूर्व कप्तान की टीम में चार टेस्ट और तीन वन-डे भी खेला और कपिल आज भी उस दौर को याद करते हैं, क्योंकि शायद बतौर युवा खिलाड़ी वह उनके करियर का बेहद नाजुक लम्हा था।
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संन्यास लेने के बाद अंपायर की भूमिका निभाते वेंकटराघवन - फोटो : ट्विटर
1978-79 में भारतीय टीम में शामिल होने वाले इस युवा ऑलराउंडर का सामना तब वेंकटराघवन से हुआ। वही भारतीय कप्तान जिन्होंने संन्यास लेने के बाद लंबे समय तक बतौर अंपायर भी इस खेल की सेवा की। कपिल की माने तो वेंकटराघवन उनकी शक्ल देखते ही आगबबूला हो जाते थे। बकौल कपिल, 'एक तो वह सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करते थे और दूसरा उनका गुस्सा जगजाहिर था। यहां तक कि अपने अंपायरिंग करियर के दौरान भी वह नॉटआउट का फैसला देते वक्त ऐसे प्रतीत होते कि गेंदबाज को डांट रहे हो।'

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श्री वेंकटराघवन
कपिल ने 41 साल पुरानी कहानी याद करते हुए बताया, '79 में मैं जब इंग्लैंड गया तब वह टीम के कप्तान थे। मैं ऐसी जगह तलाशा करता जहां, उनकी नजर मुझपर न पड़े। उस वक्त टीम में बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर जैसे खिलाड़ी थे, जिन्हें वह कुछ कह नहीं पाते थे, ऐसे में उनकी सारी भड़ास मुझ पर ही निकलती। मेरी खुराक अच्छी थी इसलिए मैं एक कोने में बैठकर चुपचाप नाश्ता करता था और मुझपर भड़कते हुए वह कहते कि ये हर वक्त खाते ही रहता है।'
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श्रीनिवास वेंकटराघवन - फोटो : सोशल मीडिया
एक दौर ऐसा भी आया वेंकटराघवन को युवा कपिल की कप्तानी में खेलना पड़ा। 1983 के इस वेस्टइंडीज दौरे में बारबडोस टेस्ट के दौरान विकेट थोड़ा उछाल भरा था इसलिए कपिल पेसर्स से ही गेंदबाजी करवा रहे थे, जो पहला स्पिनर उन्होंने आजमाया वो रवि शास्त्री थे। तभी स्लिप में खड़े वेंकी अचानक कपिल से कहते हैं, 'क्या मैं गेंदबाजी करना नहीं चाहता?' कपिल को समझ नहीं आया कि कप्तान वो हैं या वेंकटराघवन, जिसके बाद उन्हें समझाते हुए कपिल ने कहा कि, 'आपका समय भी आएगा वेंकी'।
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श्रीनिवास वेंकटराघवन - फोटो : सोशल मीडिया
मजेदार बात है कि जब कपिल युवा थे और टीम में आए थे तब वेंकटराघवन के डर से उन्हें 'सर' कहकर संबोधित करते थे, लेकिन बाद में आपसी सामंजस्य के बाद वह सिर्फ वेंकी कहना शुरू कर चुके थे। कपिल आज भी अपने पूर्व कप्तान की बेहद इज्जत करते हैं। बड़े प्यार से पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया, 'वह बेहद अच्छे इंसान थे, उनका स्वभाव बेहद प्यारा था। कप्तान होने के बावजूद वह मुझे डांट लगा देते।'
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श्रीनिवास वेंकटराघवन - फोटो : सोशल मीडिया
चेन्नई (तब के मद्रास) में जन्में वेंकटराघवन ने अपने घरेलू मैदान पर ही न्यूजीलैंड के खिलाफ इंटरनेशनल करियर का आगाज किया था। 1965 में डेब्यू करने वाले दाएं हाथ के इस बल्लेबाज और ऑफ ब्रेक बॉलर ने 57 टेस्ट, 15 एकदिवसीय मैच खेलने के बाद 1983 में संन्यास लिया फिर बतौर अंपायर 73 टेस्ट और 52 एकदिवसीय मैच में फैसले भी दिए। 
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