श्री वेंकटराघवन
कपिल ने 41 साल पुरानी कहानी याद करते हुए बताया, '79 में मैं जब इंग्लैंड गया तब वह टीम के कप्तान थे। मैं ऐसी जगह तलाशा करता जहां, उनकी नजर मुझपर न पड़े। उस वक्त टीम में बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर जैसे खिलाड़ी थे, जिन्हें वह कुछ कह नहीं पाते थे, ऐसे में उनकी सारी भड़ास मुझ पर ही निकलती। मेरी खुराक अच्छी थी इसलिए मैं एक कोने में बैठकर चुपचाप नाश्ता करता था और मुझपर भड़कते हुए वह कहते कि ये हर वक्त खाते ही रहता है।'