इंग्लैंड के सीमित ओवर टीम के कप्तान जोस बटलर ने विदेशी दौरों के दौरान परिवार के साथ को जरूरी बताया और कहा कि इससे मानसिक और भावुक समर्थन मिलता है। बटलर का बयान ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए विदेशी दौरे को लेकर नई नीति बनाई है जिसमें 45 दिन के दौरे पर टीम का परिवार दो सप्ताह तक ही उनके नाम साथ रह सकता है।
'परिवार की उपस्थिति से मदद मिलती है'
भारत और इंग्लैंड के बीच बुधवार को पहला टी20 मुकाबला खेला जाएगा। मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में बटलर ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युग में विदेशी दौरे पर परिवार की उपस्थिति अत्यधिक फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के साथ पत्नियों और बच्चों का होना एक मजबूत भावनात्मक आधार प्रदान करता है और कठिन कार्यक्रम के दौरान उनके मानसिक स्वास्थ्य में सहायता करता है।
बटलर ने कहा, यह काफी भारी सवाल है। यह अहम है। हम आधुनिक जगत में रह रहे हैं और दौरों पर परिवार का साथ रहना बहुत अच्छा है। आजकल इतना क्रिकेट खेला जा रहा है और खिलाड़ी घर से बाहर काफी समय बिताते हैं। कोरोना के बाद इस पर काफी चर्चा भी हुई है। मुझे नहीं लगता कि परिवार के साथ रहने से खेल पर बहुत फर्क पड़ता है।
बटलर ने कहा कि परिवार की मौजूदगी से पेशेवर प्रतिबद्धताओं में दखल नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, सब संभाला जा सकता है। निजी तौर पर मेरा मानना है कि घर से दूर रहने का बोझ परिवार के साथ रहकर हल्का किया जा सकता है और यह काफी महत्वपूर्ण है।
बीसीसीआई ने क्या दिशानिर्देश बनाए थे?
ऑस्ट्रेलिया में मिली करारी हार के बाद बीसीसीआई ने कड़े फैसले लिए थे जिसमें 45 दिन से अधिक के विदेशी दौरे पर खिलाड़ियों को परिवार को दो सप्ताह तक ही अपने साथ रखने की अनुमति दी गई थी। बीसीसीआई ने आधिकारिक तौर पर दिशा-निर्देशों की घोषणा नहीं की है, लेकिन मीडिया की खबरों में ये 10 सूत्री निर्देश सामने आ चुके हैं। हाल ही में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने नए नियम को लेकर अपनी राय रखी थी और बताया कि प्रबंधन ने पिछले कुछ महीनों में देखा कि उन्हें कुछ बदलावों की आवश्यकता है और इसलिए टीम बॉन्डिंग में सुधार के लिए इस नीति को लागू किया गया है।