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पिता का शव फंदे पर झूलता देख सदमे में चला गया था बचपन, अब बना दुनिया का सबसे धांसू बल्लेबाज

Tue, 14 Aug 2018 02:57 PM IST
सुमित कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Jonny Bairstow
टीम इंडिया को दूसरे टेस्ट में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के हाथों एक पारी और 159 रन के विशाल अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी। इंग्लैंड की इस जीत का ताज शतकवीर क्रिस वोक्स और लॉर्ड्स के शहंशाह जेम्स एंडरसन के सिर सजा, लेकिन क्रिकेट फैंस इस मैच के सबसे बड़े नायक जॉनी बेयरस्टो को भूल गई। इस मैच में बेयस्टोर ने 144 गेंदों पर 12 चौकों की मदद से 93 रन की पारी खेली थी।
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जॉनी बेयरस्टो - फोटो : getty
बता दें कि जॉनी न सिर्फ एक बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज हैं, बल्कि वह कमाल के फुटबॉलर और रग्बी प्लेयर भी रह चुके हैं। जॉनी बेयरस्टो के एक सफल क्रिकेटर बनने के पीछे बेहद दुखभरी कहानी छिपी है। जिस उम्र में बच्चों को खेलने-खाने से फुर्सत नहीं मिलती, उस उम्र में जॉनी ने अपने पिता को खो दिया था।
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david bairstow
जॉनी जब सिर्फ 8 साल के थे, तभी उनके पिता ने खुदकुशी कर ली थी। उनके पिता डेविड बेयरस्टो भी एक विकेटकीपर-बल्लेबाज थे। डेविड ने इंग्लिश क्लब यॉर्कशायर के लिए करीब 20 साल और इंग्लैंड के लिए चार टेस्ट मैच खेले थे। डेविड बेयरस्टो ने साल 1998 में आत्महत्या कर ली थी।

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Jonny Bairstow
एक इंटरव्यू में जॉनी ने कहा, 'जब पिताजी ने खुदकुशी की उस वक्त मैं और मेरी बहन काफी छोटे थे। उनकी मृत्यु हमारे परिवार के लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं था। खासतौर पर मेरी मां को उनकी मौत से काफी बड़ा झटका लगा था। पिताजी की मौत के बाद मैंने सोच लिया था कि अब बनना है तो सिर्फ क्रिकेटर।'
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डज
जॉनी ने बताया, 'खुदकुशी करने से पहले ही उनके पिता गहरे डिप्रेशन में चले गए थे। पैसों की तंगी और शराब पीकर गाड़ी चलाने से जुड़े एक मुकदमे को लेकर वह काफी परेशान रहते थे। इसके अलावा यॉर्कशायर मैनेजमेंट और उनके बीच मतभेदों ने भी उन्हें काफी लंबे समय तक घेरे रखा था।'
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जॉनी ने आगे कहा, 'साल 1990 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने बतौर एक रेडियो कमेंटेटर अपनी पहचान बनाई। लेकिन इन सबके बावजूद अतीत में छिपी परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही थीं। साल 1997 में परिवार को एक बड़ा झटका तब लगा जब पिताजी ने दवाइयों का ओवरडोज लेकर अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला कर लिया था।'
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Jonny Bairstow
'कुछ समय तक जिंदगी से संघर्ष करने के बाद उन्होंने खुद को फांसी लगा ली और अपने जीवन का अंत कर दिया। पंखे से लटकता पिताजी का शव आज तक मेरी नजरों में बसा हुआ है। उनके देहांत के बाद मैंने सोच लिया था क्रिकेट के मैदान पर जो वो नहीं कर पाए, वो एक दिन मैं जरूर करके दिखाउंगा।'

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बता दें कि जॉनी बेयरस्टो को एशेज टेस्ट सीरीज (2017-18) के दूसरे टेस्ट में एक आस्ट्रेलियाई फैन से बहुत ही भावनात्मक भेंट मिली थी। यह उनके दिवंगत पिता के विकेटकीपिंग ग्लव्ज थे। प्रशंसक एंड्रयू जोन्स ने एबीसी रेडियो से कहा था, 'मैंने 39 वर्ष तक इन्हें (ग्लव्ज) को रखा।'

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प्रशंसक ने बताया कि मेरी मां और पिता मुझे एडिलेड शॉपिंग सेंटर ले गए थे और इंग्लैंड की क्रिकेट टीम भी वहां आई थी। उन्होंने एक छोटा सा क्विज कॉम्पिटीशन खेला था, जिसमें उनसे पूछा गया था कि इंग्लैंड का रिजर्व विकेटकीपर कौन था तो मैंने अपना हाथ उठाया और डेविड बेयरस्टो का नाम बताया। इसके बाद उन्होंने मुझे एक जोड़ी ग्लव्ज हस्ताक्षकर करके दिए।
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जॉनी बेयरस्टो - फोटो : twitter
उन्होंने कहा, मैंने पिछले 39 वर्षों से इन्हें एक बाक्स में सहेजकर रखा है। जोन्स ने बताया था कि उन्होंने जॉनी बेयरस्टो से संपर्क किया और एडिलेड ओवल में उनसे मिलने का इंतजाम किया। अपने पिता के विकेटकीपिंग ग्लव्स पाकर जॉनी काफी भावुक हो गए थे।
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