मैदान पर अपना 100 प्रतिशत देने वाली कई फन की माहिर जेमिमा रॉड्रिग्स अच्छे प्रदर्शन के बावजूद हमेशा स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर की छत्रछाया में रहीं। हॉकी से लेकर गिटार तक में दखल रखने वाले जेमिमा इस महिला टीम की पहली खिलाड़ी हैं जिन्होंने क्षेत्ररक्षण को उसी अंदाज में जिया जैसे वह बल्लेबाजी करती हों। जेमिमा के लिए यह टूर्नामेंट भी उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्हें श्रीलंका के खिलाफ आउट होने बाहर कर दिया गया था। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने को साबित कर दिखाया।
मैच के बाद छलका जेमिमा का दर्द
भावुक जेमिमा का मैच के बाद दर्द भी छलक पड़ा। उन्हें पांच मिनट पहले ही बताया गया कि उन्हें नंबर तीन पर खेलना है। जेमिमा ने कहा, वह नहा रही थीं। इस दौरान उन्हें बताया गया कि उन्हें नंबर तीन पर खेलना है। जेमिमा ने कह कि वह यह मैच देश के लिए जीतना चाहती थी। उन्होंने कहा कि ये दिन मेरे अर्धशतक या शतक का नहीं, बल्कि देश को जिताने का था। पिछले साल, मुझे इस विश्व कप से बाहर कर दिया गया था। मैं अच्छी फॉर्म में थी। मेरे साथ लगातार कुछ न कुछ होता रहा, लेकिन मैं किसी चीज पर काबू नहीं रख पाई। मैं इस दौरान लगभग हर दिन रोई हूं। यह मेरे लिए मानसिक रूप से ठीक नहीं था।
जेमिमा के दम पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पांच विकेट से हराकर महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में प्रवेश कर लिया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.5 ओवर 338 रन बनाए थे। जवाब में भारत के लिए जेमिमा ने शतक लगाया और कप्तान हरमनप्रीत के साथ तीसरे विकेट के लिए 167 रनों की साझेदारी की जिससे भारत ने 48.3 ओवर में पांच विकेट पर 341 रन बनाकर मैच अपने नाम किया।
ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रही थीं जेमिमा
जेमिमा ने कहा, शुरुआत में मैं बस ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रही थी और खुद से बातें कर रही थी। लेकिन आखिर में मैं बस बाइबल का एक वचन दोहरा रही थी क्योंकि मेरी ऊर्जा खत्म हो गई थी, मैं बहुत थक गई थी। मैं एक वचन दोहरा रही थी जिसमें कहा गया है, बस शांत खड़ी रहो और ईश्वर तुम्हारे लिए लड़ेंगे। मैं बस खड़ी रही और उन्होंने मेरे लिए लड़ाई लड़ी।