ब्रॉड ने कहा, 'पहले ही इस पर चर्चा हो चुकी है कि किसी टेस्ट मैच से बाहर रहना पड़े तो दुखी होने की जरूरत नहीं है। यह कोई निजी हमला या बाहर करना नहीं है बल्कि प्रबंधन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी को बराबर मौका मिले।' उन्होंने कहा कि वह कभी खराब फॉर्म की वजह से बाहर नहीं होना चाहते।
ब्रॉड ने कहा, 'मैं ऐसे मुकाम पर नहीं पहुंचना चाहता जब मुझसे कहा जाए कि वापस लौटकर काउंटी क्रिकेट खेलो। आपकेबाहर होने पर नए गेंदबाज आते हैं। आप टीम में रहते हैं तो ईकाई का हिस्सा रहते हैं। पांच टेस्ट मैचों में बदलाव तो किए जाएंगे लेकिन हम इसे समझते हैं।'
भारत-इंग्लैंड सीरीज में सबकी निगाह इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन और विराट कोहली के बीच होने वाले मुकाबले पर लगी हैं लेकिन मेजबान टीम के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड का मानना है कि वह इस थ्योरी से सहमत नहीं हैं कि एक खास गेंदबाज विश्व स्तरीय बल्लेबाज को निशाना बना सकता है।
आपको दोनों छोर से दबाव बनाने की जरूरत होती है। तब कहीं जाकर बल्लेबाज की ओर से गलती की गुंजाइश होती है। यदि वह जिम्मी (एंडरसन) को सतर्कता के साथ खेले हैं और मेरी गेंदों पर रन बनाएंगे तो वह लाभ की स्थिति तो खत्म हो जाती है। एक गेंदबाजी इकाई के रूप में सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि उनके बल्लेबाजों को रन बनाने में मुश्किल हो। जहां तक बात विराट जैसे बल्लेबाज की है तो हमें प्रयास कर उन पर दबाव बनाना होगा।