फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्रिकेट को नई दिशा देने वाले डालमिया, विवादों से नहीं थे अछूते

विज्ञापन
विज्ञापन
रविवार शाम कोलकाता स्थित अस्पताल में दुनिया छोड़ चुके बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के लिए क्रिकेट ही सब कुछ रहा। क्रिकेट उनकी रगों पर था। हालांकि उन्हें राजनीति नहीं आती थी लेकिन क्रिकेट में राजनीति भली-भांति समझते थे।
विज्ञापन

1983 वर्ल्ड के बाद क्रिकेट को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की मुट्ठी से निकालने वाले डालमिया का क्रिकेट में दूसरा पहलू भी है जो विवादित रहा है। बीबीसी से बातचीत में क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगजीन ने बताया कि क्रिकेट में उनका योगदान बड़ा विवादित भी रहा।
वह बीसीसीआई के पहले ऐसे अध्यक्ष रहे जो क्रिकेट में पैसा लाए। डालमिया ने बिंद्रा के साथ मिलकर भारतीय बोर्ड की छवि बदली। उनके समय में विदेशी टेलीविजन चैनल भारत में आए। उनके अधिकार महंगे बिकने लगे। इसे उनका सकारात्मक योगदान मान सकते हैं।
विज्ञापन

डालमिया ने क्रिकेट में आईसीसी पर इंग्लैड और ऑस्ट्रेलिया के एकाधिकार को तोड़ा। जगमोहन डालमिया का मानना था कि क्रिकेट प्रशासनिक स्तर पर लोकतांत्रिक होनी चाहिए। उनसे पहले एशिया के किसी व्यक्ति का आईसीसी का अध्यक्ष बनना एक सपने जैसा ही था।

विवादों के साथ चोली-दामन का साथ

जगमोहन डालमिया का विवादों से भी चोली-दामन का साथ रहा। क्रिकेट पर जिस तरह का एकाधिकार और नियंत्रण पिछले दिनों एन श्रीनिवासन के समय में देखने को मिला उसकी शुरुआत जगमोहन डालमिया ने ही की थी।
जगमोहन डालमिया की पकड़ बीसीसीआई पर बहुत मज़बूत थी। उनके सामने कोई नही बोल सकता था, विरोध तो दूर की बात है। अधिक पैसा आने के बाद बोर्ड के पदाधिकारियों और खिलाड़ियों को अधिक से अधिक लाभ इस तरह दिया जाता था कि उनके वोट कही भी बंट ना सके। इससे क्रिकेट में ऐसी बातें घर कर गई जो नहीं होनी चाहिए थी।

मैच फिक्सिंग की बात भी आई सामने

जगमोहन डालमिया कार्यकाल में क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की बात भी सामने आई। डालमिया ने अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश की कि इसके ख़िलाफ कोई सुनवाई ना हो। क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगजीन बताते हैं कि ऐसा नही होता। वह तो कुछ ऐसे सबूत मिले, कुछ ऐसे लेख अखबारों और पत्रिकाओं में छपे जिससे लोगों को लगा कि क्रिकेट में मैच फिक्सिंग होती है।
इससे बाद सरकार ने सीबीआई को मामला सौंपा जिसके बाद जांच में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैसी क्रोनए और भारत के कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन दोषी पाए गए। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि उनका पिछला कार्यकाल अच्छा भी रहा और बुरा भी रहा। आज तो क्रिकेट में पहले से भी अधिक पैसा है जबकि डालमिया पर उनके पिछले कार्यकाल में वित्तीय अमिमियतता के भी आरोप लगे।
विज्ञापन

बोर्ड की राजनीति रही उनकी वापसी का कारण

जगमोहन डालमिया पर तमाम आरोपों के बावजूद उनकी वापसी का कारण बोर्ड की राजनीति है। जब एन श्रीनिवासन और शरद पवार आए तो उन पर आरोप लगाए गए, एफआईआर कर उन्हें जेल भेजने की कोशिश की गई।
जब नई समिति आई तो उस पर इसी तरह के आरोप लगे। लेकिन डालमिया बोर्ड के पुराने खिलाडी रह चुके हैं और पूर्व क्षेत्र की बारी भी इस बार थी, इसलिए अध्यक्ष पद के लिए इन्हीं सभी बातों ने बोर्ड में उनकी वापसी में मदद की।
डालमिया के लिए साल 2004 से लेकर 2006 का समय ठीक नही रहा। उनके ख़िलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे, उन्हे बीसीसीआई से बाहर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने वापसी भी की।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें