दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम भारत जुलाई के तीसरे सप्ताह में श्रीलंका के खिलाफ क्रिकेट के सबसे बड़े फॉर्मेट में दो-दो हाथ करती नजर आएगी। इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज के बाद टीम इंडिया की यह पहली टेस्ट सीरीज है। जिसमें उसे तीन टेस्ट मैच खेलने हैं।
सितारों से सजी टीम इंडिया में एक बार फिर ईशांत शर्मा को जगह मिली है। जो भारतीय पेस बैटरी की कमान संभाल नजर आएंगे। एक दशक लंबे क्रिकेट करियर में ईशांत के पास कई यादगार पल हैं लेकिन साल 2007 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में उन्होंने रिकी पॉन्टिंग के खिलाफ जो घातक गेंदबाजी की थी वह प्रशंसकों के दिमाग में आज भी ताजा है। उस सीरीज के निर्णायक टेस्ट में ईशांत ने 8 विकेट हासिल कर टीम इंडिया को जीत दिलाई थी।
साल 2007 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद ईशांत की गेंदबाजी के ग्राफ में इजाफा ही हुआ है। ईशांत ने जब पॉन्टिंग के खिलाफ खतरनाक स्पेल फेंका। जो पॉन्टिंग को पवेलियन भेजने पर ही खत्म हुआ था। ईशांत पॉन्टिंग को बीट कर रहे थे लेकिन उसी समय कप्तान कुंबले गेंदबाजी में बदलाव करना चाहते थे। लेकिन जब कुंबले ने बदलाव करने की सोची तब सहवाग ने उन्हें टोककर ईशांत से लगातार गेंदबाजी कराने को कहा। सहवाग ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि दिल्ली रणजी टीम के कप्तान के रूप में वह ईशांत की क्षमताओं से अच्छी तरह वाकिफ थे।
इस बारे में ईशांत ने बताया, मैं पहले ही 8 ओवर गेंदबाजी कर चुका था। ऐसे में कुंबले ने सोचा यदि मैं घायल हो गया तो टीम के पास मेरा कोई सब्स्टीट्यूट भी नहीं है। लेकिन वीरू भाई ने कहा, इसे ऐसे गेंदबाजी करने की आदत है इससे गेंदबाजी करवाते रहिए।
कुंबले को सलाह देने के बाद सहवाग ने ईशांत से कहा कि चीजों को सामान्य रखो और जैसी गेंदबाजी कर रहे हो करते रहो। कुछ नया मत करना, कोई बाउंसर नहीं कुछ नहीं। उनका सीधे तौर पर कहना था कि किसी तरीके का एक्सपेरीमेंट मत करना। इसके बाद जो परिणाम निकला वो सबको मालूम है।