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नागरिकता कानून के विरोध में फंसा IPL! 19 दिसंबर को कोलकाता में होनी है नीलामी

Mon, 16 Dec 2019 04:40 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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आईएसएल 2020, नागरिकता कानून - फोटो : सोशल मीडिया
नागरिकता कानून को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह प्रदर्शन भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से शुरू होकर उत्तर प्रदेश, राजधानी दिल्ली होते हुए अब कोलकाता पहुंच गया है। चौथे दिन भी यहां प्रदर्शन जारी है। यहां की स्थिति काफी तनावपूर्ण और हिंसात्मक है। प्रदर्शनों की वजह से कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं या विलंब से चल रही हैं। 
 
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नागरिकता कानून को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन हो रहा है - फोटो : Amar Ujala
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क और रेल मार्ग बाधित करने की खबरे हैं। पूर्वी मिदनापुर और मुर्शिदाबाज जिलों में सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने रास्ते बंद कर दिए हैं, जिससे राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मालदा, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित है। 
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आईपीएल 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे में सवाल उठता है कि इस विरोध प्रदर्शन का आईपीएल ऑक्शन पर कुछ असर तो नहीं पड़ेगा? जी हां, भारत की इस घरेलू टी-20 लीग के 13वें सीजन के लिए 19 दिसंबर को कोलकाता में खिलाड़ियों की नीलामी की जाएगी। कोलकाता में होने वाली इस नीलामी के लिए खिलाड़ियों की संख्या को घटाकर 332 कर दिया गया है। बता दें कि बीते बुधवार (13 दिसंबर) को आईपीएल प्रबंधन ने 639 खिलाड़ियों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया था और 971 रजिस्टर्ड खिलाड़ियों में से 332 खिलाड़ियों को ही शॉर्टलिस्ट किया था।

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ममता बनर्जी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस बिल के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि संशोधित कानून बंगाल में लागू नहीं होगा। बनर्जी लगातार राष्ट्रीय नागरिक पंजी और नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती रही हैं।  
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ram nath kovind - फोटो : ANI
लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की भी मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून में बदल गया। इस कानून के अनुसार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के जो सदस्य 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हैं और जिन्हें अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना पड़ा है, उन्हें गैरकानूनी प्रवासी नहीं माना जाएगा, बल्कि भारतीय नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार को राज्यसभा द्वारा और सोमवार को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
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