100 से अधिक आईपीएल मैचों में अंपायरिंग कर चुके एक पूर्व अंपायर ने बताया कि अंपायर अपने पास निर्धारित बल्ले के आकार का बैट गॉज रखते हैं। 100 से अधिक आईपीएल मैचों में अंपायरिंग कर चुके एक पूर्व अंपायर ने बताया कि अंपायर अपने पास निर्धारित बल्ले के आकार का बैट गॉज रखते हैं। अगर बल्ला इस गॉज से निकल जाता है तो कोई दिक्कत नहीं है, अगर बल्ला इससे नहीं निकलता है तो इसका मतलब यह है कि बल्ले का ब्लेड निर्धारित चौड़ाई से अधिक चौड़ा है।
आईपीएल में लग रहे लंबे छक्कों को ध्यान में रखते हुए परंपरा से हटकर मैदानी अंपायरों ने बल्लेबाजों के बल्ले के आकार की आकस्मिक जांच शुरू कर दी है। बल्ले की जांच का उद्देश्य बल्लेबाजों को अनुचित लाभ से रोकना है। बल्लों की जांच एक प्रचिलित प्रक्रिया है, लेकिन पिछले सत्र तक इसे ड्रेसिंग रूम के अंदर तक ही सीमित करके रखा गया था, लेकिन आईपीएल में बल्लेबाजों की ओर से लगातार लगाए जा रहे लंबे और बड़े स्ट्रोकों को ध्यान में रखते हुए बीसीसीआई ने और भी ज्यादा सतर्क रहने का फैसला लिया है। इसके तहत बोर्ड ने मैदानी अंपायरों को लाइव मैच के दौरान बल्लेबाजों के बल्ले की जांच का अधिकार दिया है। अंपायरों को अगर मैच के दौरान लगता है कि बल्लेबाज का बल्ला निर्धारित आकार से अधिक मोटा है तो वे मैच के बीच में ही उसके बल्ले की जांच कर सकते हैं।
बैट गॉज से नापते हैं बल्ले का आकार
100 से अधिक आईपीएल मैचों में अंपायरिंग कर चुके एक पूर्व अंपायर ने बताया कि अंपायर अपने पास निर्धारित बल्ले के आकार का बैट गॉज रखते हैं। अगर बल्ला इस गॉज से निकल जाता है तो कोई दिक्कत नहीं है, अगर बल्ला इससे नहीं निकलता है तो इसका मतलब यह है कि बल्ले का ब्लेड निर्धारित चौड़ाई से अधिक चौड़ा है। नियम के अनुसार, 2.64 इंच से ज्यादा बल्ले के मध्य भाग की चौड़ाई नहीं होनी चाहिए।
साल्ट-हार्दिक के बल्ले हो चुके हैं चेक
मैदानी अंपायरों ने अब तक हेटमायर, फिल सॉल्ट और हार्दिक पांड्या के बल्ले का आकार जांचा है। इनके बल्ले निर्धारित सीमा में पाए गए। हालांकि, बीसीसीआई अब तक इस बात पर चुप है कि क्या किसी बल्लेबाज का बल्ला निर्धारित सीमा से अधिक चौड़ा निकला है, जिसके चलते उसे मैदान में यह प्रकिया अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।