इस बार स्टेडियन क्षमता के 50 प्रतिशत दर्शकों को स्टेडियम में मैच देखने की अनुमति दी गई है।
कोरोना संक्रमित पाए जाने वाले खिलाड़ी या सदस्य को सात दिन के लिए आइसोलेट किया जाएगा। इस दौरान छठे और सातवें दिन उसका कोविड टेस्ट होगा। टीम के बायो-बबल में शामिल होने के लिए उसे 24 घंटे के अंतराल में लगातार दो आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव होना पड़ेगा।
ऐसी परिस्थिति में फ्रेंचाइजी में 12 सदस्य उपलब्ध होने पर 11 खिलाड़ियों के साथ उतरने के लिए कहा जाएगा। इनमें सात भारतीय खिलाड़ी और एक सब्सीट्यूट खिलाड़ी होगा। अगर किसी टीम के पास कम से कम 12 खिलाड़ी उपलब्ध नहीं होंगे तो बीसीसीआई उस मैच को दूसरे दिन आयोजित कराएगा। अगर ऐसा भी नहीं होता है तो मामले को टेक्निकल कमेटी के पास भेजा जाएगा। टेक्निकल कमेटी का फैसला अंतिम होगा।
बायो-बबल में इस बार सबसे बड़ा बदलाव सख्त क्वारंटीन को लेकर है। पिछली बार सात दिनों तक खिलाड़ियों और सदस्यों को क्वारंटीन होना पड़ा था। इस बार इसे घटाया गया है। खिलाड़ियों और सदस्यों को सिर्फ तीन दिन के लिए क्वारंटीन होना है। तीन दिनों तक सभी लोगों का कोरोना टेस्ट हर 24 घंटे पर होगा। ये नियन उन खिलाड़ियों या सदस्यों पर लागू नहीं होंगे जो दूसरे बायो-बबल से यहां आएंगे। कई खिलाड़ी और सदस्य द्विपक्षीय सीरीज, फ्रेंचाइजी के कैंप, घरेलू टूर्नामेंट और नेशनल कैंप से सीधे आईपीएल खेलने के लिए आ रहे हैं। उन्हें क्वारंटीन नहीं होना पड़ेगा।
कोरोनावायरस के खतरों से बचने के लिए इस बार लीग राउंड के मुकाबले महाराष्ट्र के दो शहरों के चार मैदानों पर खेले जा रहे हैं। यह मुकाबले मुंबई के वानखेड़े, डीवाई पाटिल और ब्रेबोर्न स्टेडियम तो पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में भी आयोजित किए जा रहे हैं। इस तरह खिलाड़ियों को एयरपोर्ट पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे बस से ही इन स्टेडियम के बीच यात्रा कर सकते हैं।