रविवार को दिल्ली पहुंचे खिलाड़ियों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से अपना मार्च शुरू किया लेकिन उन्हें पुलिस ने कृषि भवन के पास रोककर वापस भेज दिया। करतार ने कहा, 'मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि इस क्रूर कानून को वापस लें। पूरा देश जब कोरोना के डर से सहमा हुआ है तब उन्होंने दोनों सदनों में यह विधेयक पारित करा लिया और राष्ट्रपति से स्वीकृति ले ली।'
उन्होंने पूछा, 'मैं सहमत हूं कि कृषि कानूनों में बदलाव की जरूरत है लेकिन जब हमारे बच्चे खुश नहीं हैं तो सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए कि उन्हें खुशी दें... आखिर क्यों ये सरकार किसानों पर जबरन विवादास्पद कानून को स्वीकार करने पर जोर दे रही है?'
इस विरोध-प्रदर्शन से खिलाड़ियों के जुड़ने पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने खिलाड़ियों से अपील की कि वे सरकार पर भरोसा रखें और अपने राष्ट्रीय सम्मान और विरोध को दो अलग चीजों के रूप में लें।
आईओए अध्यक्ष नरिंदर बत्रा और महासचिव राजीव मेहता ने संयुक्त बयान में कहा, 'हाल में खिलाड़ियों को मौजूदा किसान मसले के समर्थन में अपने राष्ट्रीय पुरस्कारों को लौटाने की घोषणा करते हुए देखा गया। राष्ट्रीय पुरस्कार और किसानों का मसला दो अलग अलग चीजें हैं।'