35 वर्षीय रहाणे पिछले डेढ़ साल से टीम से बाहर थे, लेकिन इस महीने की शुरुआत में ओवल में 89 और 46 के स्कोर के साथ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में भारत के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे। वापसी करने के सिर्फ एक टेस्ट के बाद अंतरिम चीफ सेलेक्टर शिव सुंदर दास की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय चयन समिति ने रहाणे को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए रोहित शर्मा के डिप्टी के रूप में नियुक्त किया। 2021 में इंग्लैंड टूर पर रहाणे उपकप्तान थे। तब टेस्ट सीरीज में फेल रहने के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसी साल के अंत में टेस्ट सीरीज से पहले रहाणे से उपकप्तानी छीन ली गई थी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बाद रहाणे को टीम से भी बाहर कर दिया गया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या इस भूमिका के लिए शुभमन गिल जैसे किसी खिलाड़ी को तैयार करने का सही वक्त नहीं था? इसके जवाब में गांगुली ने कहा- हां, मुझे ऐसा लगता है। हालांकि, गांगुली ने न ही रहाणे के फैसले को खराब बताया, न ही इसे अच्छा बताया है। उन्होंने कहा- मैं यह नहीं कहूंगा कि बीसीसीआई ने एक कदम पीछे लिया है। आप 18 महीने तक टीम से बाहर रहे हैं, फिर आप एक टेस्ट खेलते हैं और आप उपकप्तान बन जाते हैं। मुझे इसके पीछे की विचार प्रक्रिया समझ में नहीं आती है। रवींद्र जडेजा हैं, वह लंबे समय से टीम के साथ हैं और टेस्ट मैचों में उनका खेलना निश्चित है। वह एक मजबूत दावेदार हैं।
भारत के सबसे बेहतरीन टेस्ट कप्तानों में से एक रहे गांगुली ने कहा- टीम में वापस आना और 18 महीने के बाद सीधे उपकप्तान बनना, मुझे समझ नहीं आता। मेरी एकमात्र बात यह है कि चयन में निरंतरता होनी चाहिए। भारतीय चयनकर्ताओं ने चेतेश्वर पुजारा जैसे दिग्गज बल्लेबाज को बाहर करके बदलाव का कदम उठाया है और गांगुली चाहते हैं कि भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट खेल चुके खिलाड़ी के साथ क्लीयर कम्यूनिकेशन होना चाहिए।
गांगुली ने कहा, "चयनकर्ताओं को पुजारा के बारे में स्पष्ट विचार रखना चाहिए। क्या चयनकर्ता चाहते हैं कि पुजारा फिर से कभी टेस्ट खेलें या वह युवाओं के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। इस बारे में पुजारा से स्पष्ट बातचीत होनी चाहिए। पुजारा जैसे खिलाड़ी के साथ यह खेल नहीं किया जा सकता कि उन्हें चुना, फिर ड्रॉप किया, फिर चुना और फिर ड्रॉप किया। अजिंक्य रहाणे के साथ भी ऐसा ही है।