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कश्मीरियों की तमन्ना, टीम इंडिया की जर्सी पहने रसूल

Sun, 07 Apr 2013 01:32 AM IST
जम्मू/अमर उजाला ब्यूरो
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आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट के लिए टीम इंडिया के संभावित 30 खिलाड़ियों की सूची में जगह पाने पर जम्मू कश्मीर के ऑलराउंडर परवेज गुलाम रसूल जरगर काफी उत्साहित हैं।
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रसूल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा, 'अभी तो शुरुआत है, मंजिलें तो अभी काफी दूर है उन्हें पाने के लिए हद से गुजर जाना है।'

परवेज रसूल चाहते हैं कि उनके शानदार खेल की वजह से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू कश्मीर का नाम रोशन हो।

मालूम हो कि चेन्नई में 12 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया को सस्ते में समेटकर राष्ट्रीय रसूल ने पहली बार चयनकर्ताओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने थे।

मात्र 41 रन देकर सात कंगारूओं को पवेलियन वापस भेजने वाले दाएं हाथ के आफ ब्रेक गेंदबाज रसूल ने आईसीसी चैंपियंस ट्राफी के लिए चुनी गई संभावित 30 खिलाड़ियों में जगह तो बना ली है, लेकिन अब उसका अगला पड़ाव टाप 15 में स्थान बनाना है।

हालांकि परवेज ने जिस तरह 17 प्रथम श्रेणी मैचों में 1003 रन (तीन शतक, दो अर्द्धशतक) बनाए हैं, उसकी बदौलत वह चयनकर्ताओं की नजर में चढ़ा हुआ है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसके जोरदार प्रदर्शन के कारण ही उसे इस साल आईपीएल में पुणे वॉरियर्स ने अपनी टीम में शामिल किया है।

उधर, बेटे की इस उपलब्धि पर पिता गुलाम रसूल का कहना है कि इंशा अल्लाह परवेज 15 सदस्यीय भारतीय टीम में स्थान बनाने में कामयाब होगा और वहां भी जम्मू-कश्मीर का नाम ऊंचा करेगा।
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उन्होंने कहा कि वे जेकेसीए के प्रेसीडेंट फारूक अब्दुल्ला के शुक्रगुजार हैं, जिनके प्रोत्साहन से ही रसूल आज बुलंदियों की ओर बढ़ रहा है।

बेटे की उपलब्धि पर फूली नहीं समा रही मां जरीफा ने कहा कि उनके लिए यह सबसे बड़ी खुशी है।

बहन रूबी ने कहा कि उन्हें भाई की कामयाबी पर गर्व महसूस हो रहा है, जबकि भाई आसिफ (क्रिकेटर) ने कहा कि परवेज का अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना पूरी रियासत के लिए सौभाग्य की बात है।
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उल्लेखनीय है कि 13 फरवरी 1989 को बिजबेहाड़ा में जन्मे रसूल ने वर्ष 2008 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हालांकि रसूल मानते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ प्रदर्शन ने ही उसे मानसिक रूप से भारतीय टीम के लिए सोचने को मजबूर किया।
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