क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC की माने तो भारत मैच फिक्सिंग का गढ़ बन चुका है। 2013 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के भूचाल के बावजूद देश के हालात में कोई सुधार नहीं आया। यह स्थिति तब तक ऐसी ही बनी रहेगी जब तक फिक्सिंग कानूनन अपराध की श्रेणी में न आ जाए।
श्रीसंत जैसे दिग्गज पर लगा था स्पॉट फिक्सिंग का दाग
साल 2013 में आईपीएल के दौरान हुई स्पॉट फिक्सिंग को भारतीय क्रिकेट का काला अध्याय ही माना जाएगा। कहा जा रहा है कि आईपीएल के बाद अब सट्टेबाज घरेलू लीग को निशाना बना रहे हैं। पिछले साल कर्नाटक प्रीमियर लीग (KPL) फिक्सिंग का खुलासा हुआ, जिसमें खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम मालिक भी शामिल थे।
बीसीसीआई ने कहा- 40 हजार करोड़ का अवैध धंधा है
सारा खुलासा आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट से जुड़े एक अधिकारी ने स्पोर्ट्स लॉ और पॉलिसी से जुड़े वेबिनार में हुआ। आईसीसी के एंटी करप्शन यूनिट के अधिकारी स्टीव रिचर्ड्सन के मुताबिक, 'खिलाड़ी इस कड़ी का आखिरी हिस्सा होते हैं। मुश्किल यह है कि जो इस गोरखधंधे को चलाते हैं। अपराध के मुख्य षडयंत्रकर्ता होते हैं वह मैदान के बाहर बैठते हैं। पूरे मामले में बीसीसीआई के एसीयू हेड अजीत सिंह ने भी अपनी राय रखी है। सिंह कहना है कि हर साल सट्टेबाजी से 40 हजार करोड़ रुपये की अवैध कमाई होती है। जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में सट्टेबाज खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ, ऑफिशियल्स और फ्रेंचाइजी मालिकों से संपर्क करते हैं।
कड़े कानून से ही मिलेगी निजात
मैच फिक्सिंग के खिलाफ कानून लाने वाला पहला देश श्रीलंका था, इसलिए वहां यह खेल सुरक्षित है। ऑस्ट्रेलिया में भी हालात बेहतर हैं। ऑस्ट्रेलिया के कानून के मुताबित वह किसी को भी बड़े टूर्नामेंट होने से पहले वह किसी भी शख्स को अपने देश में आने से रोक सकते हैं। भारत में 2021 वर्ल्ड टी-20 और 2023 में वन-डे वर्ल्ड कप जैसै बड़े आयोजन होने वाले हैं इसलिए कानून में अहम बदलाव हो सकता है।