भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऑलराउंडर अमनजोत कौर मानती हैं कि चोट और असफलताओं का दौर उनके लिए रुकावट नहीं, बल्कि बड़ी छलांग की तैयारी साबित हुआ। 25 वर्षीय अमनजोत ने कहा, 'जैसे घायल शेर लंबी छलांग से पहले पीछे हटता है, वैसे ही मेरा ब्रेक भी एक नए हमले से पहले का विराम था।'
श्रीलंका के खिलाफ दमदार वापसी
महिला वनडे विश्व कप के पहले मैच में श्रीलंका के खिलाफ अमनजोत कौर और दीप्ति शर्मा की साझेदारी ने भारत को मुश्किल स्थिति से निकाला और टीम को 59 रन से जीत दिलाई। यह मुकाबला अमनजोत के लिए खास था क्योंकि लंबे समय तक बाहर रहने के बाद उन्होंने अपने दमखम का फिर से सबूत दिया।
चोट और संघर्ष का सफर
दो साल पहले भारतीय टीम में डेब्यू करने वाली अमनजोत तेज गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। लेकिन स्ट्रेस फ्रैक्चर और मांसपेशियों की चोट ने उनके करियर पर ब्रेक लगा दिया। आठ महीने तक वह टीम से बाहर रहीं और टी20 विश्व कप भी मिस करना पड़ा।
वापसी का रास्ता और WPL में चमक
लंबे ब्रेक के बाद अमनजोत ने महिला वनडे चैलेंजर के जरिये वापसी की। इसके बाद विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में मुंबई इंडियंस के लिए शानदार प्रदर्शन किया और इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक जीत में 63 रन की पारी खेली। हालांकि, विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया सीरीज में वह शामिल नहीं हो पाईं।
शरीर को आराम देने का फैसला
अमनजोत ने बताया कि उन्होंने कोच अमोल मजूमदार से साफ कहा था कि अगर उन्हें विश्व कप में मौका देना है तो उनके शरीर को आराम देना जरूरी है। उन्होंने कहा, 'मेरे खेलने का फायदा तभी है जब मैं फील्डिंग में रन बचा सकूं, रन बना सकूं और विकेट ले सकूं। वरना मेरी जगह कोई और ले लेगा।'
आठ महीने का सबक
अमनजोत मानती हैं कि चोट का दौर उनके लिए सीखने का अहम समय था। उन्होंने कहा, 'पिछले आठ महीनों में मैंने अपने बारे में इतना कुछ सीखा है, जो शायद छह साल के करियर में नहीं सीख पाई। चोट को आप झटके की तरह ले सकते हैं, लेकिन मैंने इसे सीखने के मौके की तरह देखा।'