बदकिस्मती इंग्लैंड के बल्लेबाज केविन पीटरसन का पीछा नहीं छोड़ रही है। काउंटी क्रिकेट के दौरान लगी चोट के कारण वह मौजूदा आईपीएल-8 के मैचों में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए नहीं खेल पाएंगे।
इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के नए डायरेक्टर एंड्रयू स्ट्रॉस के उनके लिए इंग्लैंड टीम में वापसी के दरवाजे बंद किए जाने के बाद आईपीएल फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद ने कहा था कि वह शुक्रवार को भारत आएंगे और रविवार को मैच खेल सकते हैं।
पीटरसन भी आईपीएल मैच खेलने को लेकर उत्साहित थे पर बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार चोट के कारण पीटरसन दो हफ्ते तक क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे। पिछले साल फरवरी तक इंग्लैंड टीम में शामिल इस धुरंधर बल्लेबाज को सनराइजर्स हैदराबाद ने दो करोड़ रुपये में खरीदा था।
ईसीबी के चेयरमैन कोलिन ग्रेव्स ने पहले कहा था कि पीटरसन यदि काउंटी क्रिकेट खेलते हैं और रन बनाते हैं तो उन्हें इंग्लैंड टीम में वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। केविन ने इसी के चलते सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से खेलने की जगह काउंटी क्रिकेट में हिस्सा लिया और तिहरा शतक ठोंक दिया। लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।
KP की छुट्टी होने से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों को राहत
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के केविन पीटरसन को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर से दूर रखने के फैसले से स्तब्ध हैं पर साथ ही इस बात से उन्हें राहत भी है कि आगामी एशेज सीरीज में चिर-प्रतिद्वंद्वी टीम के इस धाकड़ बल्लेबाज से सामना नहीं होगा।
इंग्लैंड के लिए क्रिकेट के सभी प्रारूपों में सर्वाधिक रन बना चुके बल्लेबाज केविन पीटरसन को इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के नए डायरेक्टर एंड्रयू स्ट्रॉस ने बता दिया है कि काउंटी क्रिकेट में सरे के खिलाफ तिहरा शतक बनाने के बावजूद वह एशेज सीरीज में टीम का हिस्सा नहीं होंगे।
ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज रियान हैरिस ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) की वेबसाइट पर लिखा, "यदि पीटरसन ने सरे की ओर से लगातार शतक लगाए तो उन्हें टीम में लेने का दबाव बढ़ जाएगा। लिहाजा जब तक इंग्लैंड टीम नहीं चुन ली जाती तब तक मैं इस बात पर विश्वास नहीं करने वाला हूं।" हैरिस ने कहा कि वैसे वह बहुत खुश होंगे यदि सीरीज में केविन जैसे बल्लेबाज से सामना नहीं हो।
टेस्ट क्रिकेट में पीटरसन को सर्वाधिक दस बार आउट कर चुके पीटर सिडल ने कहा कि यकीनन वे अच्छे खिलाड़ी हैं, उन्हें गेंदबाजी करना कठिन होता है। उनका विकल्प ढूंढना संभव नहीं है। ऐसे बल्लेबाज जिनका टेस्ट औसत 50 हो, उसके विपक्षी टीम में न होने से खुशी तो होती है।