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टीम में 'गुटबंदी' खत्म करनी है तो BCCI अपनाए 2007 का फॉर्मूला

Tue, 18 Dec 2012 03:07 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
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इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 1-2 से हार के बाद पूरी टीम इंडिया कटघरे में खड़ी है। ज्यादातार क्रिकेट विश्लेषक मानते हैं कि कप्तान धोनी को अब जाना चाहिए। भारतीय क्रिकेट की मौजूदा परिस्थितियों को देखा जाए तो धोनी को हटाने का विकल्प सबसे आसान दिखता है। लेकिन क्या इस बात को लेकर विश्लेषक आश्वस्त हैं कि धोनी को हटाने के बाद किसे कप्तानी दी जानी चाहिए?
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धोनी के बाद अगर कोई नाम सबकी जुबां पर आता है तो वो है विराट कोहली का, हालांकि कोहली ने अभी तक टेस्ट मैचों में कप्तानी नहीं की है। ऐसी स्थिति में टीम इंडिया के पास इतिहास से सीखने के अलावा कुछ नहीं है।

कुंबले की कप्तानी में धोनी ने सीखे टेस्ट कैप्टेंसी के गुर
टीम में बढ़ती गुटबंदी के बाद 2005 में गांगुली को कप्तानी छोड़नी पड़ी। तत्काल में द्रविड़ को कप्तानी दी गई लेकिन वो दबाव नहीं झेल सके और 2007 में 25 टेस्ट बाद खुद कप्तानी से किनारा कर गए। उस समय बीसीसीआई ने हिम्मत दिखाते हुए सीनियर खिलाड़ी कुंबले को कप्तानी दी। कुंबले उस समय अपने कैरियर के अंतिम दौर में थे। कुंबले को कप्तानी देने के पीछे यह मंशा थी कि उनके अंडर में एक कप्तान तैयार किया जाए। उस समय धोनी को कुंबले की कप्तानी में सीखने का मौका मिला और बाद में धोनी को टेस्ट टीम की कप्तानी दे दी गई। धोनी ने इस पोस्ट को कैसे संभाला वो आज इतिहास है।
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अब सचिन बनें कप्तान, कोहली उप कप्तान
आज फिर वही कहानी दोहराई जा रही है। एक बार फिर टीम इंडिया उसी गुटबंदी से गुजर रही है। टीम इंडिया यह टेस्ट सीरीज केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन से नहीं हारी है बल्कि टीम में गुटबंदी इसका मुख्य कारण था। सहवाग, गंभीर और धोनी ने जिस तरह मौजूदा समय में एक दूसरे पर उंगली उठाई है वो इस हार के मुख्य कारण हैं। ऐसी स्थिति में बीसीसीआई को चाहिए कि इतिहास से सीख लेते हुए एक बार फिर सीनियर खिलाड़ी की छाया में भविष्य का कप्तान तैयार करे। इसके लिए सचिन और कोहली की जोड़ी सबसे फिट बैठती है।
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