भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट में मिली हार के बाद लाल गेंद के प्रारूप की टीम में बदलाव को लेकर खुलकर बात की। गंभीर ने कहा कि टीम में बदलाव के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी। भारत को बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पांचवें और अंतिम टेस्ट में छह विकेट से हार का सामना करना पड़ा जिससे टीम ने सीरीज 1-3 से गंवा दी। इसके साथ ही भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल में जगह बनाने से चूक गया।
सीरीज के बीच अश्विन ने लिया था संन्यास
सीरीज के बीच में पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था जिसके बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया था कि विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज भारतीय बल्लेबाज टेस्ट प्रारूप को अलविदा कह सकते हैं। हालांकि, रोहित ने शनिवार को स्पष्ट किया कि उनका संन्यास लेने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। वहीं, टेस्ट टीम में बदलाव को लेकर लंबे समय से बात चल रही है, लेकिन सीरीज में हार के बाद गंभीर से जब यह सवाल किया गया तो उन्होंने फिलहाल ऐसा कुछ होने की पुष्टि नहीं की।
गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, टेस्ट टीम में बदलाव के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी। हमें नहीं पता कि पांच महीने बाद क्या होगा, कौन कहां होगा। पांच महीने का समय काफी लंबा होता है। मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि जो भी होगा वो भारतीय टीम के लिए जो सर्वश्रेष्ठ होगा और उसके हित में होगा।
भारत को लंबे समय बाद खेलना है टेस्ट
भारत ने सितंबर 2024 से अब तक 10 टेस्ट खेले हैं जिनमें बांग्लादेश से दो, न्यूजीलैंड से तीन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेली। बांग्लादेश के अलावा भारत को न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। भारत को अब इंग्लैंड से सीमित ओवरों की सीरीज खेलनी है फिर चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लेना है। इसके बाद खिलाड़ी आईपीएल 2025 में व्यस्त हो जाएंगे। भारत को डब्ल्यूटीसी के अगले चक्र की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ जून में होनी वाली टेस्ट सीरीज से करनी है। यानी करीब पांच-छह महीने तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को टेस्ट प्रारूप में कोई मुकाबला नहीं खेलना है।
गंभीर से यह पूछा गया कि जब टीम सफलता हासिल करती है तो ड्रेसिंग रूम का माहौल खुश होता है, लेकिन हारने पर माहौल निराशजनक होता है। इस पर मुख्य कोच ने कहा, ड्रेसिंग रूम को खुश रखने के लिए मुझे ईमानदार होना होता है और सभी के साथ निष्पक्ष रहना पड़ता है। अगर मैं किसी एक-दो खिलाड़ी के प्रति विशेष रवैया अपनाता हूं तो यह गलत होगा। मेरा काम जिस खिलाड़ी ने डेब्यू नहीं किया और ऐसे खिलाड़ी जो 100 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके हैं, सभी को देखने का है। अगर मैं ऐसा नहीं कर रहा हूं तो मैं अपने काम के प्रति ईमानदार नहीं हूं।