भारत को मिली शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारतीय टीम को बधाई दी थी। मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'खेल के मैदान पर भी ऑपरेशन सिंदूर। यहां भी नतीजा वही- भारत जीता। हमारे क्रिकेटरों को इसके लिए बधाई।' अब सूर्यकुमार ने पीएम के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, अच्छा लगता है जब देश का लीडर फ्रंट फुट पर बल्लेबाजी करता है। यह ऐसा है जैसे वह खुद स्ट्राइक लेकर रन बना रहे हैं। यह देखकर बहुत अच्छा लगा और जब सर सामने खड़े हों तो निश्चित रूप से खिलाड़ी खुलकर खेलेंगे।
भारत ने नहीं उठाई विजेता ट्रॉफी
भारत की जीत के बाद उस वक्त विवाद हुआ जब भारत ने एशिया क्रिकेट परिषद (एसीसी) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। भारतीय टीम ने ट्रॉफी नहीं उठाई और पुरस्कार समारोह वहीं खत्म कर दिया गया। इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि नकवी ट्रॉफी लेकर अपने होटल के कमरे में चले गए हैं और बोर्ड आईसीसी से इसकी शिकायत करेगा।
नकवी के हाथों ट्रॉफी नहीं लेने पर क्या बोले कप्तान?
नकवी के हाथों से ट्रॉफी नहीं लेने पर सूर्यकुमार ने कहा, मैं इसे विवाद नहीं कहूंगा। अगर आपने देखा हो, तो लोगों ने ट्रॉफी की तस्वीरें इधर-उधर पोस्ट की हैं। लेकिन असली ट्रॉफी तो तब मिलती है जब आप लोगों का, खिलाड़ियों का, अपने द्वारा अर्जित विश्वास का, सपोर्ट स्टाफ का, उनके द्वारा दिखाए गए विश्वास का और पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों का दिल जीतते हैं। वही असली ट्रॉफी होती है। असली ट्रॉफी मैदान पर मौजूद इतने सारे लोगों की मेहनत होती है।
एशिया कप जीतने पर भारतीय कप्तान ने कहा, यह बहुत ही सुखद अहसास है। जब आप अजेय रहते हुए टूर्नामेंट जीतते हैं तो यह काफी अच्छा होता है। पूरी टीम और देश के लिए यह काफी अच्छा क्षण है। हमें काफी आनंद आया। पिछली रात हम साथ में ही थे और हम सभी ने काफी आनंद किया।
मैच के बाद कप्तान सूर्यकुमार एशिया कप के सभी मैचों की अपनी फीस पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों और सशस्त्र बलों को देने का एलान किया था। इस पर सूर्यकुमार ने कहा, जब मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में जा रहा था, तो मैंने सोचा कि इतने सारे भारतीय वहां मौजूद हैं और हम कम से कम कुछ छोटी-मोटी मदद तो कर ही सकते हैं। अगर सब थोड़ा-थोड़ा योगदान दें, तो अच्छा रहेगा। मैं उस समय पूरी लाइन नहीं लिख पाया, क्योंकि यह सशस्त्र बलों और पहलगाम हमले के पीड़ितों के लिए है। सब कुछ इतनी तेजी से हो रहा था कि उस अफरा-तफरी में मैं ज्यादा कुछ नहीं कह पाया। लेकिन मैं जो भी कर सकता हूं, करूंगा।