गांगुली की तरह अपने बल्ले और कप्तानी का डंका दुनिया भर में बजाने वाले धोनी कभी विजडन की सूची में जगह नहीं बना पाए जबकि उन्होंने इंग्लैंड की धरती पर कुछ बेहतरीन पारियां खेली हैं। विश्वनाथ ने अपना उच्चतम स्कोर 222 रन इंग्लैंड के खिलाफ बनाया था लेकिन तब स्थान चेन्नै था लेकिन 1979 में लॉर्ड्स में खेली गई उनकी 113 रन की पारी को भला कौन भुला सकता है जिससे भारत ने मैच ड्रॉ करवाया था।
धुरंधर ओपनर रहे सहवाग कभी विजडन के पांच क्रिकेटरों में शामिल नहीं हो पाए लेकिन उन्हें 2003 से शुरू किए वर्ष के अग्रणी क्रिकेटर (विजडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वर्ल्ड) में दो बार (2008 और 2009) जगह मिली है। यह सम्मान सचिन तेंडुलकर (2010) और विराट कोहली (2016 से 2019) को भी मिला है।
भारत ही नहीं विश्व के कई चोटी के क्रिकेटरों को कभी विजडन के पांच क्रिकेटरों की सूची में जगह नहीं मिली। इनमें इंजमाम उल हक, एबी डि विलियर्स, डेविड वॉर्नर, रोस टेलर, क्रिस गेल, स्टीफन फ्लेमिंग, रंगना हेराथ, नाथन लियोन, डेनियल विटोरी, चमिंडा वास, मिशेल जॉनसन, मोर्ने मोर्कल आदि शामिल हैं।
डीविलियर्स को हालांकि विजडन ने पिछले साल दशक के पांच क्रिकेटरों में शामिल किया था। सीके नायुडू (1933) विजडन में जगह बनाने वाले पहले विशुद्ध भारतीय क्रिकेटर थे। उनसे पहले रणजीतसिंह जी (1897), उनके भतीजे दलीपसिंह जी (1930) और नवाव पटौदी सीनियर (1932) को यह सम्मान मिला था लेकिन ये तीनों तब इंग्लैंड की तरफ से खेला करते थे।
विजडन ने 2000 से 2003 तक इस पुरस्कार के लिए विश्व भर के प्रदर्शन को ध्यान में रखा। इस बीच वीवीएस लक्ष्मण को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता में खेली गई 281 रन की ऐतिहासिक पारी के लिए विजडन के क्रिकेटरों में जगह मिली थी। विजडन ने हालांकि इसके बाद फिर से पुरानी परंपरा पर वापस लौटने का फैसला किया और विश्व भर के क्रिकेटरों के लिए विजडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वर्ल्ड की शुरुआत की।
विजडन के वर्ष के पांच क्रिकेटरों में शामिल भारतीय क्रिकेटर: सीके नायडू (1933), विजय मर्चेंट (1937), वीनू मांकड़ (1947), मंसूर अली खां पटौदी (1968), भगवत चंद्रशेखर (1972), सुनील गावसकर (1980), कपिल देव (1983), मोहिंदर अमरनाथ (1984), दिलीप वेंगसरकर (1987), मोहम्मद अजहरूद्दीन (1991), अनिल कुंबले (1996), सचिन तेंदुलकर (1997), राहुल द्रविड़ (2000), वीवीएस लक्ष्मण (2002), जहीर खान (2008), शिखर धवन (2014) और विराट कोहली (2019)।