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एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप के दौरान कई खिलाड़ी हुए बीमार, नहीं मिला भारतीय खाना

Fri, 03 May 2019 09:48 PM IST
Rajeev Rai हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली

सार

  • एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप के दौरान भारतीय खाना नहीं मिलने से कई एथलीट हुए बीमार
  • एफआई ने दी साई को सलाह कैंप में कांटीनेंटल खाना देने से खिलाडिय़ों को पड़ेगी इसकी आदत
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विस्तार
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दोहा (कतर) में समाप्त हुई एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप के दौरान भारतीय खाना उपलब्ध नहीं होने के चलते कई एथलीटों को बीमार होना पड़ा। एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया ने विदेश प्रवास के दौरान एथलीटों को आगे से इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए उन्होंने साई को सलाह दी है कि राष्ट्रीय कैंप के दौरान खिलाड़ियों को कांटीनेंटल खाना भी परोसा जाना चाहिए। ऐसा करने से खिलाड़ियों को इस तरह के भोजन की आदत पड़ेगी और विदेशी टूर्नामेंटों में खाने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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बीमार हुए एथलिट

फेडरेशन की ओर से खेल मंत्रालय और साई को सौंपी गई चैंपियनशिप की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि दोहा के होटल में परोसा गया खाना एथलीटों के स्वाद के अनुसार नहीं था। टीम के लिए यह बेहद गंभीर विषय बन गया था।  जब तक इस समस्या से निपटने के उपाय किए गए तब तक कई एथलीट डायरिया की चपेट में आ चुके थे। एथलीटों को भारतीय खाना नहीं मिल रहा था और वे कांटीनेंटल खाने के आदी नहीं हैं। अगर उन्हें आगे से राष्ट्रीय कैंप में कांटीनेंटल खाना भी मिलेगा तो वे हर तरह के भोजन के आदी हो सकेंगे। हेप्टाथलान में 5वें स्थान पर रहने वाली पूर्णिमा हेंबराम को डायरिया से जूझने के चलते स्पर्धा खत्म होने के बाद स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा था।  


 
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जेब खर्च दिए जाने की मांग

यही नहीं चैंपियनशिप के दौरान एथलीटों और कोच के पास अतिरिक्त खर्च भत्ता भी नहीं था। जेब खर्च मिलने से एथलीट मन मुुताबिक पानी और पसंद का खाना खरीद कर खा सकते हैं।
वैसे सरकारी नियमों के मुताबिक विदेशी टूर्नामेंटों के लिए खिलाडिय़ों को 25 डॉलर प्रति दिन का अतिरिक्त  जेब खर्च दिया जाता है, लेकिन देखा गया है कि इसका भुगतान टीम रवानगी के दौरान नही बल्कि बाद में किया जाता है।

यही नहीं यह भी मांग की गई है कि एथलीटों को आगे से सीधी फ्लाइट की व्यवस्था कराई जानी चाहिए। चैंपियनशिप के लिए एथलीट तीन ग्रुपों में दोहा गए, लेकिन उन्हें पहले पटियाला सेे दिल्ली उसके बाद नागपुर और फिर दोहा जाना पड़ा जो काफी थकाने वाला था।a
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