फेडरेशन की ओर से खेल मंत्रालय और साई को सौंपी गई चैंपियनशिप की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि दोहा के होटल में परोसा गया खाना एथलीटों के स्वाद के अनुसार नहीं था। टीम के लिए यह बेहद गंभीर विषय बन गया था। जब तक इस समस्या से निपटने के उपाय किए गए तब तक कई एथलीट डायरिया की चपेट में आ चुके थे। एथलीटों को भारतीय खाना नहीं मिल रहा था और वे कांटीनेंटल खाने के आदी नहीं हैं। अगर उन्हें आगे से राष्ट्रीय कैंप में कांटीनेंटल खाना भी मिलेगा तो वे हर तरह के भोजन के आदी हो सकेंगे। हेप्टाथलान में 5वें स्थान पर रहने वाली पूर्णिमा हेंबराम को डायरिया से जूझने के चलते स्पर्धा खत्म होने के बाद स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा था।
यही नहीं चैंपियनशिप के दौरान एथलीटों और कोच के पास अतिरिक्त खर्च भत्ता भी नहीं था। जेब खर्च मिलने से एथलीट मन मुुताबिक पानी और पसंद का खाना खरीद कर खा सकते हैं।
वैसे सरकारी नियमों के मुताबिक विदेशी टूर्नामेंटों के लिए खिलाडिय़ों को 25 डॉलर प्रति दिन का अतिरिक्त जेब खर्च दिया जाता है, लेकिन देखा गया है कि इसका भुगतान टीम रवानगी के दौरान नही बल्कि बाद में किया जाता है।
यही नहीं यह भी मांग की गई है कि एथलीटों को आगे से सीधी फ्लाइट की व्यवस्था कराई जानी चाहिए। चैंपियनशिप के लिए एथलीट तीन ग्रुपों में दोहा गए, लेकिन उन्हें पहले पटियाला सेे दिल्ली उसके बाद नागपुर और फिर दोहा जाना पड़ा जो काफी थकाने वाला था।a