‘इंडियन प्रीमियर लीग’ की तर्ज पर लगता है कि ‘इंडियन पुलिस लीग’ मुकाबला दिल्ली व मुंबई पुलिस के बीच चल रहा है।
क्रिकेट के आईपीएल मैदान में भले ही दिल्ली फिसड्डी और मुंबई शीर्ष पर चल रही हो, लेकिन पुलिसिया ‘आईपीएल’ में तो दिल्ली ने मुंबई को मात दे दी है।
दिल्ली पुलिस ने मुंबई पुलिस को क्रिकेटरों व फिक्सरों की गिरफ्तारी की भनक तक नहीं लगने दी और बीती रात मुंबई के मरीन ड्राइव थाने में एंट्री कर सभी आरोपियों को दिल्ली भी ले आई।
दिल्ली व मुंबई पुलिस के बीच अपनी वाहवाही लूटने का यह पहला मामला नहीं है।
दोनों महानगरों की पुलिस के बीच उनके क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन की सूचना न देने और आपराधियों को उठा ले जाकर उनकी किरकिरी करने के आरोप एक दूसरे पर लगते रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला जनवरी 2011 में हुआ था। देश में हुए कई बम धमाकों के मामले में दिल्ली पुलिस को आतंकी यासीन भटकल की तलाश थी।
उसके मुंबई में छिपे होने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने उसके दो सहयोगियों मोहम्मद नकी व मोहम्मद तकी को विश्वास में लेकर भटकल तक पहुंचने का रास्ता बताया।
इस बीच मोहम्मद तकी पर संदेह होने के बाद मुंबई पुलिस ने उसे पकड़ लिया। मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मुंबई पहुंची दिल्ली पुलिस के हाथों से यासीन भटकल निकल गया।
मुंबई पुलिस की वजह से आतंकी के हाथ से निकल जाने पर दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय को शिकायत की थी।
एक अन्य मामले 2012 में दिल्ली पुलिस ने पुणे ब्लास्ट के आरोपी हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी को दक्षिण भारत से दबोचा था।
इसकी भनक भी मुंबई पुलिस को नहीं मिली थी, जबकि मुंबई पुलिस की टीमें उसे रात-दिन तलाश रही थीं। इसको लेकर भी मामला उठा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार आईपीएल मैच फिक्सिंग में भी दिल्ली पुलिस करीब एक माह से मुंबई में सक्रिय थी, लेकिन उसने मुंबई पुलिस को भनक तक नहीं लगने दी और कई गिरफ्तारी वहां से कीं।
क्रिकेटरों सहित 12 गिरफ्तारी मुंबई में होने के बाद पुलिस को या तो वहां के थाने में मामला दर्ज कराना था या एंट्री।
ऐसे में दिल्ली पुलिस ने वहां एफआईआर दर्ज कराई होती तो उनकी वहां पर गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस को इनका ट्रांजिट रिमांड लेना पड़ता। ऐसे में इस खुलासे का श्रेय मुंबई पुलिस ले सकती थी।
यह समझते हुए मुंबई पुलिस के सक्रिय होने से पूर्व ही श्रीशंत सहित अन्य आरोपियों को दिल्ली पुलिस यहां ले आई।