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IND W vs AUS W: विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए कोच मजूमदार ने टीम को क्या दिया था संदेश? खुद किया खुलासा

Fri, 31 Oct 2025 02:36 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नवी मुंबई

सार

मजूमदार ने कहा कि सात बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में अपनी टीम को उनका एक ही संदेश था कि अच्छे से फिनिश करना है और हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम ने वही किया।
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अमोल मजूमदार - फोटो : BCCI Women
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विस्तार
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भारतीय महिला टीम ने गुरुवार को अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराकर वनडे विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया। भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया का सामना करना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने जेमिमा रॉड्रिग्स और हरमनप्रीत कौर की शानदार पारियों के दम पर सबसे सफल रन चेज हासिल किया। अब भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने बताया है कि जब टीम को विशाल लक्ष्य मिला तो उन्होंने खिलाड़ियों को क्या संदेश दिया था। 
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मैच फिनिश करने का दिया संदेश 
ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने जीत के लिए 339 रनों का लक्ष्य रखा था। जवाब में भारत के लिए जेमिमा ने नाबाद 127 रन और हरमनप्रीत कौर ने 89 रन बनाए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 167 रनों की साझेदारी हुई जिसकी मदद से भारत ने यह मुकाबला अपने नाम किया। मजूमदार ने कहा कि सात बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में अपनी टीम को उनका एक ही संदेश था कि अच्छे से फिनिश करना है और हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम ने वही किया।

गौड़ और श्री चरणी पर भरोसा कायम रखा
मजूमदार ने कहा, 'कोई बड़ा संदेश नहीं था। हम हमेशा एक दूसरे से कहते रहते हैं कि फिनिश अच्छे से करना है। हम आम तौर पर शुरुआत अच्छी करते हैं लेकिन फिनिशिंग पर काम करने की जरूरत रहती है। ये वही दिन था।' ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले उन्होंने व्हाइटबोर्ड पर एक ही बात लिखी, हमें फाइनल में पहुंचने के लिए बस एक रन अधिक बनाना है। उन्होंने युवा क्रांति गौड़ और श्री चरणी पर भरोसा रखा जो काम आया। मजूमदार ने कहा, क्रांति ने डेब्यू के बाद से शानदार प्रदर्शन किया है। वह प्रतिदिन सीख रही हैं। रेणुका ठाकुर उसका बखूबी साथ दे रही है।

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जेमिमा को तीसरे नंबर पर भेजना काम आया
उन्होंने जेमिमा पर भी पूरा भरोसा रखा और उसे तीसरे नंबर पर भेजने का फैसला मास्टर स्ट्रोक रहा। उन्होंने कहा, मुझे हमेशा से लगता था कि जेमिमा हालात के अनुरूप अपने खेल में बदलाव का माद्दा रखती है और इस एक फैसले से काफी फर्क पड़ा। हरमन सारे समय शांतचित्त होकर खेली और मुस्कुराती रहीं। दीप्ति ने सभी की हौसलाअफजाई की और स्मृति भी जोश से भरी रहती हैं। सभी को अपनी भूमिका पता है और इससे मदद मिलती है।
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