भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो अक्तूबर से अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दो मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट खेला जाएगा। इस दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम घरेलू पिच पर स्पिनरों की मददगार वाली पिच बरकरार रखना चाहेगी या किसी अन्य विकल्प पर आगे बढ़ेगी। रोहित शर्मा के युग में घरेलू टेस्ट मैचों के लिए स्पिनरों की मददगार पिच तैयार करना सही रणनीति थी, लेकिन देखना होगा कि नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल इसी पर आगे बढ़ेंगे या नहीं।
न्यूजीलैंड के खिलाफ स्पिन पिच पर संघर्ष करते दिखे थे भारतीय बल्लेबाज
भारतीय टेस्ट टीम का परिवर्तन काल इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ। अब टीम प्रबंधन के पास घरेलू मैदानों की पिचों की प्रकृति को लेकर फैसला करने का भारी दबाव होगा। टीम घरेलू सरजमीं पर स्पिनरों की मददगार पिचों में न्यूजीलैंड से करारी शिकस्त झेल चुकी है, जबकि तेज गेंदबाजों की मददगार इंग्लैंड की परिस्थितियों में युवा बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया।
वेस्टइंडीज की टीम इस प्रारूप में ज्यादा मजबूत नहीं है ऐसे में इस सवाल का तुरंत जवाब ढूंढने की शायद जरूरत ना पड़े। भारतीय टीम अपने घरेलू सत्र की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैचों की सीरीज से कर रही है। सीरीज का पहला टेस्ट गुरुवार से दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम में शुरू होगा और मैच से दो दिन पहले पिच पर हरी घास दिखाई दे रही थी। मैदानकर्मियों ने दिन के समय में उस पर ज्यादा काम नहीं किया। दूसरा टेस्ट 10 से 14 अक्तूबर तक नई दिल्ली में खेला जाएगा।
इसमें कोई रहस्य नहीं है कि अतीत में पिचें टीम की खेल शैली के अनुसार तैयार की जाती रही हैं और पूर्व कप्तान रोहित अक्सर इस रणनीति का बचाव करते थे। यह शायद सही भी था, क्योंकि टीम ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। भारत ने घरेलू सरजमी पर पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ शिकस्त झेलने से पहले 12 वर्षों में घरेलू मैदान पर 18 सीरीज जीतीं। बारिश से प्रभावित पहले टेस्ट में बेंगलुरु में तेज गेंदबाजों की मददगार पिच पर न्यूजीलैंड से हारने के बाद, भारत ने सीरीज के दूसरे और तीसरे टेस्ट के लिए पुणे और मुंबई में पूरी तरह से स्पिनरों को मदद करने वाली पिचों पर खेलने का मन बनाया लेकिन भारतीय बल्लेबाज न्यूजीलैंड के स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष करते दिखे थे।