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ये जीत विराट कोहली के जोखिम की जीत है

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विराट कोहली - फोटो : ट्विटर
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विशाखापत्तनम टेस्ट मैच में मिली जीत में विराट कोहली का बड़ा जोखिम छुपा हुआ है। जिस अंदाज में उन्होंने दूसरी पारी में 'डिक्लेयर' किया वो 'रिस्की' हो सकता था। लेकिन विराट कोहली ने अपने गेंदबाजों पर भरोसा किया और गेंदबाजों ने उन्हें नतीजा दिया। इस कहानी को समझने के लिए आंकड़ों के विस्तार में जाना होगा।

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विराट कोहली ने दूसरी पारी में 323 के स्कोर पर 'डिक्लेयर' किया। उसके बाद दक्षिण अफ्रीका के सामने 395 रनों का लक्ष्य था। विराट कोहली ने चौथे दिन भी अफ्रीकी टीम को 9 ओवर बल्लेबाजी करने का मौका दिया। यानी दक्षिण अफ्रीका के पास बल्लेबाजी के लिए करीब 100 ओवर थे। ये सच है कि चौथी पारी में 395 रन का लक्ष्य किसी पहाड़ से कम नहीं। लेकिन सच ये भी है कि पहली पारी में जिस तरह दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने प्रदर्शन किया था उसके बाद ये लक्ष्य नामुमकिन भी नहीं था।

टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से ये लक्ष्य नामुमकिन तब माना जाता जब विराट कोहली दक्षिण अफ्रीका के सामने साढ़े चार सौ रनों के आस पास का लक्ष्य रखते। लेकिन विराट ने यहीं चाल चली उन्होंने 395 रनों का 'ट्रिकी' लक्ष्य अफ्रीकी टीम के सामने रखा और इसी लक्ष्य में मेहमानों को फंसा लिया। ऐसा भी नहीं कि मैच के आखिरी दिन की पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत खराब रही हो लेकिन रनों का दबाव और गेंदबाजों की लाइन लेंथ ने टीम इंडिया को जीत दिलाई।  
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पहली पारी में अफ्रीकी बल्लेबाजों का शानदार प्रदर्शन    

पहली पारी में दक्षिण अफ्रीका की तरफ से दो शतक लगे थे। सलामी बल्लेबाज डीन एल्गर ने शानदार 160 रन बनाए थे। उनके अलावा मिडिल ऑर्डर में क्विंटन डी कॉक ने भी 111 रन बनाए थे। कप्तान फाफ ड्यूप्लेसी ने भी अर्धशतक लगाया था।

इन तीनों बल्लेबाजों के प्रदर्शन में एक बात ध्यान रखने वाली है। टेस्ट क्रिकेट में उस टीम की बल्लेबाजी को हमेशा से बेहतर आंका जाता है जिसमें मिडिल ऑर्डर में एक ऐसा बल्लेबाज हो जो नई गेंद के सामने क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी कर सकता हो। अफ्रीकी टीम में क्विंटन डी कॉक ने यही रोल निभाया था। पहली पारी में भारत के 502 रनों के जवाब में अगर कोई भी मेहमान टीम 431 रन जोड़ दे तो अच्छे से अच्छे कप्तान के इरादे डगमगाते हैं।

टॉप ऑर्डर से लेकर मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाजों में से अगर दो बल्लेबाज भी क्रीज पर टिक गए तो 395 रनों का लक्ष्य हासिल किया जा सकता था। दूसरी पारी में अफ्रीकी बल्लेबाजी के लड़खड़ाने की बड़ी वजह ही यही थी कि पहली पारी के ये तीनों स्टार दूसरी पारी में बिल्कुल सस्ते में आउट हो गए। एल्गर ने 2 रन बनाए, ड्यूप्लेसी ने 13 रन बनाए और डीकॉक तो खाता खोले बगैर आउट हो गए। विराट कोहली का 'रिस्क' इसीलिए उनकी 'सक्सेस' में तब्दील हो गया। 
 
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जोखिम लेने से पहले की प्लानिंग  

विराट कोहली ने विशाखापत्तनम टेस्ट में जोखिम लेने से पहले बाकयदा प्लानिंग की। इसीलिए दूसरी पारी में जब भारतीय टीम बल्लेबाजी करने उतरी तो अलग 'स्ट्रेटजी' के साथ उतरी। हर एक बल्लेबाज को ये ताकीद दे दी गई थी कि टेस्ट क्रिकेट में वनडे की तर्ज पर रन बनाने हैं।

यही वजह थी कि भारतीय टीम की तरफ से विराट कोहली समेत तीन बल्लेबाजों ने सवा सौ की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। बल्लेबाजी क्रम में रवींद्र जडेजा को प्रमोट करके ऊपर भेजा गया। उन्होंने 32 गेंद पर 40 रन बनाए। विराट कोहली ने 25 गेंद पर 31 रन बनाए। अपेक्षाकृत धीमी बल्लेबाजी करने वाले अजिंक्य रहाणे ने 17 गेंद पर 27 रन बनाए। इन तीनों बल्लेबाजों ने मिलकर करीब 6 ओवर में 100 रन जोड़े। ये भी विराट कोहली का 'रिस्क' ही था।

पिछली पारी के शतकवीर रोहित शर्मा ने इस पारी में भी शतक लगाया लेकिन दोनों पारियों में उनका स्ट्राइक रेट अलग अलग था। पहली पारी में उन्होंने 72 की स्ट्राइक रेट से शतक लगाया था जबकि दूसरी पारी में उन्होंने 85 से ज्यादी की स्ट्राइक रेट से रन बनाया।

सीधे तौर पर ये कोशिश थी कि गेंदबाजों को दक्षिण अफ्रीका के 10 विकेट लेने के लिए ज्यादा से ज्यादा ओवर दिए जाएं। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से हर एक जीत अब अहम है और विराट कोहली ने साबित कर दिया है कि इसके लिए वो जोखिम लेने से भी नहीं चूकेंगे।   

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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