पहली पारी में दक्षिण अफ्रीका की तरफ से दो शतक लगे थे। सलामी बल्लेबाज डीन एल्गर ने शानदार 160 रन बनाए थे। उनके अलावा मिडिल ऑर्डर में क्विंटन डी कॉक ने भी 111 रन बनाए थे। कप्तान फाफ ड्यूप्लेसी ने भी अर्धशतक लगाया था।
इन तीनों बल्लेबाजों के प्रदर्शन में एक बात ध्यान रखने वाली है। टेस्ट क्रिकेट में उस टीम की बल्लेबाजी को हमेशा से बेहतर आंका जाता है जिसमें मिडिल ऑर्डर में एक ऐसा बल्लेबाज हो जो नई गेंद के सामने क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी कर सकता हो। अफ्रीकी टीम में क्विंटन डी कॉक ने यही रोल निभाया था। पहली पारी में भारत के 502 रनों के जवाब में अगर कोई भी मेहमान टीम 431 रन जोड़ दे तो अच्छे से अच्छे कप्तान के इरादे डगमगाते हैं।
टॉप ऑर्डर से लेकर मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाजों में से अगर दो बल्लेबाज भी क्रीज पर टिक गए तो 395 रनों का लक्ष्य हासिल किया जा सकता था। दूसरी पारी में अफ्रीकी बल्लेबाजी के लड़खड़ाने की बड़ी वजह ही यही थी कि पहली पारी के ये तीनों स्टार दूसरी पारी में बिल्कुल सस्ते में आउट हो गए। एल्गर ने 2 रन बनाए, ड्यूप्लेसी ने 13 रन बनाए और डीकॉक तो खाता खोले बगैर आउट हो गए। विराट कोहली का 'रिस्क' इसीलिए उनकी 'सक्सेस' में तब्दील हो गया।
विराट कोहली ने विशाखापत्तनम टेस्ट में जोखिम लेने से पहले बाकयदा प्लानिंग की। इसीलिए दूसरी पारी में जब भारतीय टीम बल्लेबाजी करने उतरी तो अलग 'स्ट्रेटजी' के साथ उतरी। हर एक बल्लेबाज को ये ताकीद दे दी गई थी कि टेस्ट क्रिकेट में वनडे की तर्ज पर रन बनाने हैं।
यही वजह थी कि भारतीय टीम की तरफ से विराट कोहली समेत तीन बल्लेबाजों ने सवा सौ की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। बल्लेबाजी क्रम में रवींद्र जडेजा को प्रमोट करके ऊपर भेजा गया। उन्होंने 32 गेंद पर 40 रन बनाए। विराट कोहली ने 25 गेंद पर 31 रन बनाए। अपेक्षाकृत धीमी बल्लेबाजी करने वाले अजिंक्य रहाणे ने 17 गेंद पर 27 रन बनाए। इन तीनों बल्लेबाजों ने मिलकर करीब 6 ओवर में 100 रन जोड़े। ये भी विराट कोहली का 'रिस्क' ही था।
पिछली पारी के शतकवीर रोहित शर्मा ने इस पारी में भी शतक लगाया लेकिन दोनों पारियों में उनका स्ट्राइक रेट अलग अलग था। पहली पारी में उन्होंने 72 की स्ट्राइक रेट से शतक लगाया था जबकि दूसरी पारी में उन्होंने 85 से ज्यादी की स्ट्राइक रेट से रन बनाया।
सीधे तौर पर ये कोशिश थी कि गेंदबाजों को दक्षिण अफ्रीका के 10 विकेट लेने के लिए ज्यादा से ज्यादा ओवर दिए जाएं। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से हर एक जीत अब अहम है और विराट कोहली ने साबित कर दिया है कि इसके लिए वो जोखिम लेने से भी नहीं चूकेंगे।
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