ऐसे बहुत ही कम गेंदबाज हैं, जो अजिंक्य रहाणे को परेशान कर सकते हैं। अपने करियर के शुरुआती 18 में से 17 मैच विदेशी जमीन पर खेलने वाले मुंबई के बल्लेबाज ने गजब सफलता हासिल की। रहाणे का विदेश में रिकॉर्ड बेहतरीन रहा। उन्होंने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका में खूब रन बनाए जबकि दक्षिण अफ्रीका में एक बार 90 से अधिक रन की पारी खेली। हालांकि, रहाणे घरेलू पिचों पर संघर्ष करते नजर आए। भारत में उनकी औसत 32.87 की रही जबकि विदेश में यह बढ़कर 52.05 की रही।
इससे रहाणे के स्पिन खेलने की क्षमता पर सवाल खड़े हुए। वैसे, यह अफवाह ज्यादा लगी क्योंकि रहाणे ने स्पिनर्स के लिए मददगार पिचों पर कई बार बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिसमें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दिल्ली की पिच पर दोनों पारियों में शतक शामिल है। इसके अलावा कोलंबो में दो शतक और न्यूजीलैंड के खिलाफ 188 रन की पारी भी शामिल है। हालांकि, इंग्लैंड को उम्मीद है कि वह रहाणे की कमजोरी स्पिनर्स द्वारा ही निकालेंगे।
इसके लिए उन्हें उपयुक्त विकल्प मोइन अली लगे। भाारत के खिलाफ अली का टेस्ट में प्रदर्शन अच्छा रहा है। 2014 में वॉरसेस्टरशायर के ऑलराउंडर ने दो बार रहाणे का विकेट लिया। इसके बाद से इन दोनों के बीच जोरदार टसल होने लगी है। अब आगामी सीरीज में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक बार फिर फाइट देखने को मिल सकती है।
टीम इंडिया के दो तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और भुवनेश्वर कुमार चोटिल हैं। ऐसे में टीम इंडिया के पास उमेश यादव, मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा के रूप में प्रमुख तेज गेंदबाज शामिल हैं। शमी ने पिछले छह महीनों से कोई प्रथम-श्रेणी मैच नहीं खेला है जबकि इंग्लिश परिस्थितियों में शर्मा गेंद को स्विंग कराने के लिए संघर्ष करते दिखे हैं।
इससे यादव पर जिम्मेदारी होगी कि वह एलिस्टर कुक को जल्दी आउट करें। कुक भी अब वैसे धाकड़ बल्लेबाज नहीं रहे, जैसे हुआ करते थे। उन्होंने पिछले 16 टेस्ट में दो शतक जमाए हैं। हालांकि, दोनों ही दोहरे शतक रहे हैं। वैसे, भारत के खिलाफ कुक अलग ही मोड में बल्लेबाजी करते दिखे हैं। उन्होंने 2010 से टीम इंडिया के खिलाफ 54.37 की औसत से रन बनाए हैं।
यादव के पास मौका है कि वह इस बाएं हाथ के बल्लेबाज की कमजोरी का पता करें और अपनी टीम को जल्दी सफलता दिलाएं ताकि इंग्लैंड को हावी होने का मौका नहीं मिले। यादव उन चुनिंदा भारतीय गेंदबाजों में से एक हैं, जिनमें बल्लेबाज की कमजोरी को उजागर करने की क्षमता है और वह पारी में लेट स्विंग कराना भी जानते हैं। हालांकि, यादव कई मौकों पर अनिरंतर प्रदर्शन करने के लिए भी लोकप्रिय हैं। ऐसे में यादव और कुक के बीच जोरदार टसल होने की उम्मीद है।
स्टुअर्ट ब्रॉड आधुनिक टेस्ट मैच युग में सबसे घातक गेंदबाजों में से एक हैं। 2015 एशेज सीरीज में 15/8 का स्पेल हो या दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 17/6 विकेट लेना। यह सब आधुनिक युग के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी स्पेल में से एक हैं।
हालांकि ब्रॉड का 2011 में भारत के खिलाफ प्रदर्शन लचर रहा था। ब्रॉड का डटकर मुकाबला करने की बड़ी जिम्मेदारी चेतेश्वर पुजारा पर रहेगी। पुजारा भारत के बाहर संघर्ष करते रहे हैं, लेकिन वह खतरनाक बल्लेबाज हैं और इससे विरोधी टीमें अच्छी तरह वाकिफ हैं।
पुजारा के पास गेंदबाज को निराश करने की तकनीक है। वह डिफेंस से बल्लेबाज को निराश करते हैं। हालांकि, पिछली बार पुजारा ने लॉर्ड्स पर अच्छी बल्लेबाजी की थी जो टीम इंडिया के लिए कहीं न कहीं मैच विनिंग साबित हुई। उन्होंने इंग्लिश गेंदबाजों को जमकर परेशान किया था।
रविचंद्रन अश्विन विश्व के सर्वश्रेष्ठ ऑफ स्पिनर्स में से एक हैं। वह विश्व के किसी भी बल्लेबाज को परेशान करने में सक्षम हैं। ऐसे ही इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उनका प्रमुख शिकार जो रूट हो सकते हैं।
जो रूट आधुनिक क्रिकेट में विश्व के शीर्ष-4 क्रिकेटरों में शुमार हैं। मगर भारतीय टीम की कोशिश रूट को जल्दी पवेलियन भेजने की रहेगी ताकि इंग्लैंड को पूरे समय बैकफुट पर रख सकें।
रूट स्पिनर्स का डटकर मुकाबला जरूर करते हैं, लेकिन अश्विन को चुनौतियां लेना पसंद हैं। वह किसी भी बल्लेबाज के लिए बुरा सपना बनना चाहते हैं। रूट ने हाल ही में संपन्न वन-डे सीरीज में लगातार दो शतक जड़कर अपना फॉर्म दर्शाया। ऐसे में टीम इंडिया के अश्विन की कोशिश रहेगी कि वह अपनी फिरकी के जाल में इंग्लिश बल्लेबाज को उलझाएं और टीम इंडिया को बड़ी सफलता दिलाएं।
कोई मायने नहीं रखता कि विराट कोहली ने पिछले चार सालों में क्या हासिल किया है। इंग्लैंड में 13.40 की औसत आलोचक उन्हें हर बार याद दिलाना पसंद करते हैं। इस बार कोहली के पास पिछली सीरीज की असफलता को मात देने का शानदार मौका है।
आलोचकों का मानना है कि विराट कोहली स्विंग और तेज गेंदबाजों के सामने संघर्ष करते हैं। वैसे इसे कोरी अफवाह कहना गलत नहीं होगा क्योंकि विराट ने ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड की तेज पिचों पर खूब रन बनाए हैं।
हालांकि, अगर कोहली को सर्वकालिक महान बल्लेबाजों की श्रेणी में शामिल होना है तो उन्हें इंग्लैंड में बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत है। 2014 के बाद से कोहली ने अपनी तकनीक में काफी सुधार किया है। हालांकि, क्रीज पर आने के कुछ देर तक उनकी डिफेंस तकनीक में अब भी सुधार की जरूरत महसूस होती है।
वैसे, 2014 में कोहली को सबसे ज्यादा परेशान जेम्स एंडरसन ने किया था। उन्होंने चार बार विराट को अपना शिकार बनाया था। पिछले तीन सालों में एंडरसन ने 78 विकेट लिए हैं, जो उनके फॉर्म को दर्शाता है।
इसमें कोई शक नहीं कि इस बार भी एंडरसन के निशाने पर विराट कोहली रहेंगे। वहीं कोहली की कोशिश 2014 की असफलता को भूलाकर अपने आपको बेहतरीन बल्लेबाज साबित करने की होगी। निश्चित ही यह फाइट पूरी सीरीज की जान रहेगी।