तमिलनाडु में एक शहर है तिरुपुर, जो अपने कपड़ा उद्योग के लिए पहचाना जाता है। रमेश यहीं अपनी दो कंपनियां चलाते हैं, जिसका माल यूरोप तक जाता है। लगभग 700 लोगों को रोजगार देने वाले रमेश के इस काम में उनकी चार्टर एकांउटेंट पत्नी भी मदद करती हैं। इंटरनेशनल बिजेनस में एमबीए करने वाले 42 वर्षीय रमेश ने मनोविज्ञान की डिग्री भी ली है। जनवरी के पहले हफ्ते में जब रमेश को यह ऑफर मिला तो वह खुद फैसला नहीं कर पाए, उन्हें अपने परिवार से सलाह लेनी पड़ी। एक सवाल ये भी था कि इस जिम्मेदारी के दौरान उनका इतना बड़ा कारोबार संभालेगा कौन? इतनी कहानी पढ़कर आपके दिमाग में भी यह चल रहा होगा कि आखिर एक सफल बिजनेसमैन का क्रिकेट से क्या लेना-देना जो उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई।
अपने कॉलेज के दिनों में 110 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय मेडल जीत चुके रमेश ने 1996 में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व किया था। लगभग 10 साल पहले रमेश ने तिरुपुर में क्रिकेट स्कूल खेला। नए बच्चों को बेहतर खिलाड़ी बनाने के लिए उन्होंने जमीन खरीदी और वहां बेहतरीन मैदान तैयार किए। जहां एक टर्फ पिच और 12 प्रैक्टिस पिच बनाई। अब मैदान की देखरेख में मुश्किल न आए इसलिए उन्होंने खुद यह कला सीखी। तमिलनाडु क्रिकेट संघ ने उन्हें बीसीसीआई के इस कोर्स की जानकारी दी जिसमें पिच बनाना सिखाया जाता है। यह कोर्स देश के जाने-माने पिच क्यूरेटर और बिहार के पूर्व क्रिकेटर दलजीत सिंह के दिमाग की उपज थी, जो 2019 में बीसीसीआई के ग्राउंड पिच कमेटी के हेड के रूप में रिटायर हुए।
जुलाई 2018 में कोर्स पास करने के बाद रमेश ने कोयंबटूर, तिरुपुर और सलेम में अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 बीसीसीआई टूर्नामेंट्स की कई पिच तैयार की। इसके बाद उन्होंने आईपीएल में भी देश के कई वरिष्ठ क्यूरेटर्स के साथ समय गुजारा। आईपीएल 2019 के दौरान टीएनसीए उन्हें चेपॉक की पिच बनाने का निमंत्रण दे चुका था, लेकिन व्यवसायिक मजबूरियों ने रमेश को बांधे रखा। रमेश के पास पिच तैयार करने के लिए 26 मैदानकर्मियों की बड़ी टीम है।
बीसीसीआई ने मदद के लिए बोर्ड की पिच कमेटी के तपोश चटर्जी को भी भेजा है, जो बारीकी से पूरे ऑपरेशन पर नजर रख रहे हैं। यहां दो टेस्ट मैच के लिए दो अलग-अलग प्रकार की पिच पर काम काम किया जा रहा है। एक पूर्णत: लाल मिट्टी से बन रही है दूसरी पिच मिश्रित प्रोफाइल की है। चेपॉक की लाल मिट्टी वाली पिच वानखेड़े स्टेडियम से अलग होगी, जहां का उछाल हर गेंदबाज को मदद देता है। चेन्नई में लाल मिट्टी एक बार रोल करने के बाद फ्लैट हो जाएगी। दूसरी पिच का आधार तीन इंच स्थानीय लाल मिट्टी का होगा, जिसकी ऊपर परत काली मिट्टी की होगी, किस पिच पर मैच खेला जाएगा इसका फैसला अंतिम वक्त पर किया जाएगा।