साउथ हैम्पटन की पिच पर भारतीय गेंदबाजों ने कोहराम मचा दिया था। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करना मेजबान टीम को भारी पड़ रहा था क्योंकि 86 रन के स्कोर पर उसके शीर्ष 6 बल्लेबाज आउट हो गए थे।
इंग्लैंड के बल्लेबाजों को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि वह अधिकतम 150 रन बना सकेंगे। मगर ऐसा संभव नहीं हुआ। भारतीय गेंदबाजों ने अपनी पकड़ को मजबूत नहीं किया और इसका फायदा अंग्रेजो को मिला। मेजबान टीम ने अपना स्कोर 250 रन के करीब पहुंचा दिया। इंग्लैंड को इस स्कोर से बेहतर गेंदबाजी करने का विश्वास मिला और अंत में नतीजा सभी के सामने निकला।
टीम इंडिया के गेंदबाजों ने इंग्लैंड को पहली पारी में 246 रन पर ऑलआउट करके अपना काम पूरा किया। इसके बाद बारी बल्लेबाजों की थी। कोहली और पुजारा ने शतकीय साझेदारी की और लगा कि टीम इंडिया विशाल बढ़त लेने में कामयाब हो जाएगी।
कोहली के आउट होते ही भारतीय बल्लेबाजी क्रम धराशायी हुआ। वहीं चेतेश्वर पुजारा ने अपने टेस्ट करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए बेहतरीन शतक जमाया। पुजारा की पारी की बदौलत टीम इंडिया इंग्लैंड पर मामूली बढ़त लेने में कामयाब हुई।
यह बड़ा फर्क रहा क्योंकि टीम इंडिया को जल्दी समेटने से इंग्लैंड के पास मनोवैज्ञानिक बढ़त रही। इसका फायदा उसे मैच में भी मिला। अगर टीम इंडिया विशाल बढ़त लेती तो वह आसानी से मुकाबला जीत सकती थी।
टीम इंडिया के फैंस को इंग्लैंड की हालत देख महसूस हुआ होगा कि मेहमान टीम सीरीज 2-2 से बराबर कर लेगी। मगर दोनों पारियों में भारतीय बल्लेबाजों ने अपने फैंस को निराश किया और इसका परिणाम टीम इंडिया को सीरीज गंवाकर भुगतना पड़ा।
पहली पारी में कोहली के विकेट से पहले टीम इंडिया का स्कोर 2 विकेट पर 142 रन था। कोहली के आउट होने के बाद टीम इंडिया का स्कोर जल्द ही 8 विकेट पर 195 रन हो गया था। चेतेश्वर पुजारा के शतक की बदौलत किसी तरह टीम इंडिया बढ़त लेने में कामयाब हुई।
दूसरी पारी में भी टीम इंडिया का यही हाल रहा। कोहली जब आउट हुए तब टीम इंडिया का स्कोर तीन विकेट पर 123 रन था। कोहली के आउट होने के बाद नंबर-1 टेस्ट टीम का स्कोर 9 विकेट पर 163 रन हो गया था।
इंग्लैंड के ऑफ स्पिनर मोइन अली को चौथे टेस्ट में 134 रन देकर 9 विकेट लेने के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। वहीं भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने मैच में 124 रन खर्च किए और सिर्फ तीन विकेट हासिल किए।
अश्विन जिस दर्जे के गेंदबाज हैं, उनसे इस तरह के फीके प्रदर्शन की उम्मीद बिलकुल भी नहीं की जा सकती। वह भी तब जब स्पिनर के लिए पिच मददगार साबित हो रही हो। अश्विन को गेंदबाजी करने के लिए आदर्श परिस्थितियां मिली थी, लेकिन वह उसका कोई फायदा नहीं उठा सके।
इसके अलावा बल्ले से भी अश्विन का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। अश्विन पहली पारी में कमाल नहीं कर सके जबकि उनके पास टीम को विशाल बढ़त दिलाने का शानदार मौका था। दूसरी पारी में उनके पास मैच जिताने का मौका था, लेकिन वह सफल नहीं हुए।
इस साल में चार बार टीम इंडिया को 190 से 300 रन के बीच का लक्ष्य मिला और चारों ही बार वह लक्ष्य का पीछा करने में सफल नहीं हुई। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इस साल की शुरुआत में टीम इंडिया को 208 और 287 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन विराट सेना 135 व 151 रन पर सिमट गई।
मौजूदा सीरीज के पहले टेस्ट में टीम इंडिया को 194 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन वह 31 रन से मुकाबला गंवा बैठी। अब साउथ हैम्पटन में टीम इंडिया को नुकसान उठाना पड़ा और वह 60 रन से मैच हार गई।
चौथी पारी में लक्ष्य का पीछा करना कभी आसान नहीं होता। मगर चार बार ऐसा लगा कि टीम इंडिया जीत दर्ज कर लेगी। अचानक ही उसका बल्लेबाजी क्रम फ्लॉप हुआ और नतीजा टीम को हार के साथ भुगतना पड़ा।