इस मैच के दोपहर बाद एक बजकर 30 मिनट से शुरू होने की संभावना है और खेल रात आठ बजकर 30 मिनट तक चल सकता है। दलजीत का मानना है कि गुलाबी गेंद की चमक लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पिच पर अधिक घास रखनी होगी। उन्होंने और उनकी टीम ने 2016 में दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट के दौरान ऐसा किया था जब मैच ग्रेटर नोएडा में दूधिया रोशनी में खेले गए थे।
उन्होंने कहा, 'गुलाबी गेंद जल्दी गंदी हो जाती है और इसलिए उन्हें पिच पर अधिक घास रखनी होगी। आपको याद होगा जबकि एडिलेड में (2017 में) पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेला गया था तो उन्होंने पिच पर 11 मिमी घास रखी थी। आपको इतनी घास को तैयार करना होगा। आप मैच के एक दिन पहले इसे नहीं काट सकते या फिर पिच धीमी खेलेगी।'
दलजीत ने कहा, '(दलीप ट्रॉफी मैचों के दौरान) ओस एक मसला था, गेंद वास्तव में गंदी हो जाती थी। पिच पर सात मिमी घास थी जबकि अमूमन घास 2। 5 से चार मिमी लंबी होती है। घास लंबी होने का मतलब है कि गेंद बहुत अधिक सीम करेगी।'
एक अन्य क्यूरेटर ने गोपनीयता की शर्त पर मैच से दो तीन दिन पहले से आउटफील्ड की घास पर पानी न डालने की सलाह दी। उन्होंने कहा, 'ओस मसला होगा लेकिन तब बहुत अधिक ठंड नहीं रहेगी। सुपरसोपर्स के अलावा ओस से निबटने में उपयोगी रसायनों का उपयोग किया जा सकता है। आउटफील्ड में काफी घास काटनी होगी। मैच से दो दिन पहले पानी डालना बंद करना होगा क्योंकि इससे नमी बन जाएगी।'
उन्होंने कहा, 'आउटफील्ड में हम अमूमन सात से आठ मिमी घास रखते हैं लेकिन दिन रात्रि टेस्ट मैच के लिए यह छह मिमी रखी जा सकती है। इससे आप ओस का प्रभाव कम कर सकते हैं लेकिन आप प्राकृतिक परिस्थितियों से पूरी तरह नहीं निबट सकते हो।'