शेन वार्न हों या दूसरा कोई ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर भारत के खिलाफ भारतीय पिचों पर उन्हें सफलता गाहे-बगाहे ही रास आई है। बार्डर गावस्कर ट्राफी में सिर्फ एक मौका ऐसा आया है जब शेन वार्न की गेंदबाजी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय धरती पर टेस्ट जीता है। लेकिन पूरे पांच साल बाद भारतीय धरती पर शनिवार को नॉथन लियोन के रूप में कोई ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर चला।
अब तक लियोन को न तो भारतीय बल्लेबाजों ने और न ही ऑस्ट्रेलिया के महान खिलाड़ियों ने कोई खास तवज्जो दी। लेकिन कोटला की उखड़ी हुई पिच पर जिस अंदाज में उन्होंने गेंदबाजी की उससे भारतीय टीम पहली बार इस श्रंखला में बैकफुट पर खड़ी दिखाई दे रही है।
लियोन ने लगातार 22 ओवरों का स्पैल डाला। राउंड द विकेट उन्होंने विकेटों पर गेंद रखते हुए सभी भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया। उन्होंने अपने कैरियर में तीसरी बार पांच विकेट लिए। मैच के बाद उन्होंने स्वीकार किया यह उनके कैरियर का गेंदबाजी में अब तक का सर्वश्रेष्ठ दिन था।
कोहली और तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों का विकेट लेना वाकई गौरव की बात है। उन्हें खुशी है कि वह अपनी टीम के लिए काम आए। लियोन की यह सफलता इस वजह से भी महत्वपूर्ण है क्यों की पांच साल पहले 2008 में जेसन क्रेजा ने नागपुर में 212 रनों पर आठ विकेट लिए थे। लेकिन यह टेस्ट ऑस्ट्रेलिया हारा था।
माइकल क्लार्क ने 2004 में मुंबई में नौ रनों पर छह विकेट लिए थे। यह टेस्ट भी कंगारू हारे। शेन वार्न ने 125 रनों पर छह विकेट इसी श्रंखला में लिए लेकिन यह टेस्ट ड्रा रहा। लेकिन स्पिन गेंदबाजी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2000 में टेस्ट जीता। जब वार्न ने 47 रनों पर चार विकेट लेकर बंगलूरू में अपनी टीम को जिताया।