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T20 World Cup: किस तरह आक्रमक होकर खेलने के लिए प्रेरित हुए सैमसन? न्यूजीलैंड सीरीज के बाद बदली मानसिकता

Sun, 15 Mar 2026 10:14 AM IST
Sovit Chaturvedi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप में आक्रमक शैली अपनाने पर बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में प्लेइंग-11 में जगह नहीं बना पाने के कारण वह पूरी तरह टूट गए थे।
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संजू सैमसन - फोटो : IANS
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विस्तार
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टी20 विश्व कप में भारत को मिली खिताबी जीत में अहम योगदान देने वाले संजू सैमसन एक समय प्लेइंग-11 में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। लेकिन उन्होंने खुद को मिले मौके का फायदा उठाया। सैमसन ने विश्व कप के दौरान आक्रमक खेल का प्रदर्शन किया और आखिरी तीन मैचों में तीन अर्धशतक लगाए। सैमसन को यह अच्छी तरह पता था कि प्लेइंग-11 में जगह बनाने के लिए उन्हें अपने ही साथियों से मुकाबला करना पड़ेगा और वह इस कारण थोड़े हिचकिचा भी रहे थे। 
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न्यूजीलैंड सीरीज के बाद प्लेइंग-11 से हुए थे बाहर
विश्व कप से पहले भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली थी जिसमें सैमसन का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। संजू ने माना कि प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिल पाने की वजह से वह पूरी तरह से टूट गए थे। सैमसन ने एक कार्यक्रम में कहा, मैं उस तरह का इंसान हूं जो अपने लिए अच्छा करने के बजाय दूसरों के लिए ज्यादा अच्छा करता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीजला में मैं टीम में जगह बनाने के लिए अपने ही साथियों से मुकाबला कर रहा था और मुझे यह बिल्कुल भी सहज नहीं लग रहा था। मैं बहुत ज्यादा बेचैन था क्योंकि मुझे पता था कि मेरा सपना अब बहुत करीब है। लेकिन टीम अलग-अलग संयोजन आजमा रही थी तो टीम में हूं या नहीं, उस समय मेरे मन में इसी तरह के ख्याल चल रहे थे।

संजू ने कहा, मैं पूरी तरह से टूट गया था क्योंकि मेरा सपना विश्व कप जीतना था। मैं तो टीम की शुरुआती एकादश में भी शामिल नहीं था। इसलिए मैं असल में पांच छह दिनों के लिए सबसे दूर चला गया था और मैंने खुद को फिर से संभालना शुरू किया। मैंने खुद को तैयार करना शुरू कर दिया था, यह जानते हुए कि आपको कभी नहीं पता कि खेल आपको बदले में क्या देगा।
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सैमसन बोले- आईसीसी ट्रॉफी जीतना था लक्ष्य
संजू को यह बहुप्रतीक्षित मौका चेन्नई में जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत के सुपर आठ मैच के दौरान मिला। 31 वर्षीय खिलाड़ी ने बहुत ज्यादा रन नहीं बनाए, लेकिन उन्हें टीम प्रबंधन से यह भरोसा मिला कि वह अगले चार मैच में प्लेइंग-11 में शामिल रहेंगे। उन्होंने कहा, मुझे पता था कि टीम प्रबंधन को मुझ पर भरोसा है। जिम्बाब्वे मैच से ही, हमें चार में से चार मैच जीतने थे और टीम को मेरी जरूरत थी। इसलिए तभी मेरे लिए चीजें सकारात्मक हो गईं और मैं बहुत जोश में आ गया। जिस दिन से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, मेरा एकमात्र लक्ष्य सबसे पहले देश के लिए खेलना था। एक बार जब आप देश के लिए खेल लेते हैं तो आपका सबसे बड़ा लक्ष्य अपने देश के लिए आईसीसी ट्रॉफियां जीतना होता है। शुरुआत वैसी नहीं थी जैसी मैं चाहता था, लेकिन फिर भी मैं खुश था क्योंकि टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही थी और हम मैच जीत रहे थे।
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