उन्होंने कहा, 'बायो बबल में मौलवी आए और हमने नमाज पढ़ी। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मौलवी, मौलाना जो भी देहरादून में शिविर के दौरान दो या तीन शुक्रवार को आए, उन्हें मैंने नहीं बुलाया था।' जाफर ने कहा, 'इकबाल अब्दुल्ला ने मेरी और मैनेजर की अनुमति जुमे की नमाज के लिए मांगी थी।' इस पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने ट्वीट करके कहा, 'कप्तानी के लिए जय बिस्टा के नाम की सिफारिश की थी, इकबाल की नहीं लेकिन सीएयू अधिकारियों ने इकबाल को पसंद किया।'
बता दें कि भारत के लिए 31 टेस्ट खेल चुके जाफर ने कहा था कि टीम में मुस्लिम खिलाड़ियों को तरजीह देने के सीएयू के सचिव माहिम वर्मा के आरोपों से उन्हें काफी तकलीफ पहुंची। जाफर ने चयन में दखल और चयनकर्ताओं और संघ के सचिव के पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था। जाफर को जून 2020 में उत्तराखंड का कोच बनाया गया था। उन्होंने एक साल का करार किया था। उत्तराखंड की टीम सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में पांच में से एक ही मैच जीत सकी।
वहीं, इस बीच क्रिकेटर मनोज तिवारी ने ट्वीट कर कहा, 'मैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अनुरोध करूंगा कि वे इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान दें, जिसमें हमारे नेशनल हीरो वसीम भाई को क्रिकेट संघ में साम्प्रदायिक करार दिया गया था। इस पर आवश्यक कार्रवाई करें। एक उदाहरण सेट करने का समय आ गया है।'
मैनेजर की रिपोर्ट के आधार पर करेंगे कार्रवाई : वर्मा
उत्तराखंड क्रिकेट संघ (सीएयू) ने पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर के कोच रहते जैविक रूप से सुरक्षित माहौल (बायो बबल) के कथित उल्लंघन के मुद्दे पर सीनियर टीम के मैनेजर से रिपोर्ट मांगी है। वर्मा ने सीएयू की विज्ञप्ति में कहा, 'उत्तराखंड क्रिकेट संघ (सीएयू) वसीम जाफर से जुड़ी घटना की गंभीरता का संज्ञान लिया है और अपनी सीनियर टीम के मैनेजर नवनीत मिश्रा को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।'
वर्मा ने कहा, 'मिश्रा के विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के बाद ही हम भविष्य की कार्रवाई पर फैसला करेंगे। हम पहले ही मैनेजर से जैविक रूप से सुरक्षित माहौल के उल्लंघन पर पूछताछ कर रहे हैं और उल्लंघन के लिए दोषी किसी भी व्यक्ति/सहायक स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करेंगे क्योंकि खिलाड़ियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है।'